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पुरानी कार खरीदते वक्त इन दस्तावेजों की जांच जरूरी, वरना फंस सकते हैं कानूनी झंझट में

दिल्ली ब्लास्ट की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है कि धमाके में इस्तेमाल की गई गाड़ियां पुरानी यानी सेकंड हैंड थीं, जिनका ओनरशिप ट्रांसफर समय पर नहीं हुआ था। इससे एक बार फिर यह सवाल उठ खड़ा हुआ है कि क्या लोग पुरानी कार खरीदते या बेचते समय जरूरी दस्तावेजों की सही जांच करते हैं? भारत में हर महीने लाखों पुरानी कारें खरीदी-बेची जाती हैं, लेकिन कई लोग सिर्फ औपचारिकता निभाकर डॉक्यूमेंटेशन पूरा करते हैं। नतीजतन, जब कोई वाहन किसी अपराध में शामिल होता है, तो परेशानी असली मालिक के सिर पर आ जाती है।

अगर आप भी पुरानी कार खरीदने जा रहे हैं, तो सावधानी जरूरी है। कार की आरसी (RC), इंश्योरेंस, पीयूसीसी (PUCC), एनओसी (NOC) और ओनरशिप ट्रांसफर की स्थिति जांचें। मालिकाना हक ट्रांसफर न होने पर भविष्य में जुर्माना या कानूनी कार्रवाई हो सकती है। इसके लिए आरटीओ में फॉर्म 29 और 30 भरना जरूरी है। अगर गाड़ी दूसरे राज्य में जा रही है, तो फॉर्म 28 (NOC) भी जरूरी है। वहीं, अगर कार पर लोन था, तो बैंक से फॉर्म 35 और एनओसी लेना अनिवार्य है।

सेलर को आरसी, वैध इंश्योरेंस और पीयूसीसी जमा करना होता है, जबकि खरीदार को पहचान और पते का प्रमाण देना पड़ता है। सभी दस्तावेज आरटीओ में जमा करने के बाद नया रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (RC) जारी किया जाता है। यह पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन शुरू की जा सकती है, लेकिन ऑफलाइन सत्यापन जरूरी है। एक छोटी सी लापरवाही भविष्य में बड़ी कानूनी मुसीबत बन सकती है।