सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक सुनवाई के दौरान आपराधिक मानहानि कानून पर अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि अब समय आ गया है जब मानहानि को आपराधिक श्रेणी से बाहर किया जाना चाहिए. यह टिप्पणी अदालत ने जेएनयू प्रोफेसर अमिता सिंह द्वारा द वायर न्यूज पोर्टल के खिलाफ दायर एक आपराधिक मानहानि मामले की सुनवाई के दौरान की.
यह मामला 2016 की एक रिपोर्ट से जुड़ा है, जिसमें दावा किया गया था कि प्रोफेसर अमिता सिंह जेएनयू के उन शिक्षकों के समूह का नेतृत्व कर रही थीं जिन्होंने एक डोजियर तैयार किया था. इस डोजियर में जेएनयू को “संगठित सेक्स रैकेट” का केंद्र बताया गया था और कुछ शिक्षकों पर अलगाववादी विचारधारा को बढ़ावा देने का आरोप लगाया गया था. इसके खिलाफ अमिता सिंह ने द वायर और उसके रिपोर्टर पर मानहानि का केस किया था.
दिल्ली की निचली अदालत ने 2017 में द वायर को समन जारी किया था जिसे हाईकोर्ट ने भी बरकरार रखा. इसके खिलाफ द वायर ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया. सुनवाई के दौरान जस्टिस एमएम सुंदरेश ने टिप्पणी की कि आपराधिक मानहानि को अब अपराध की श्रेणी से बाहर किया जाना चाहिए. द वायर की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल ने इस विचार से सहमति जताई और कहा कि यह कानून अब पुराना हो चुका है और इसमें सुधार की जरूरत है. भारत अब भी उन गिने-चुने देशों में शामिल है जहां मानहानि एक आपराधिक अपराध है.









