पहलगाम हमले के बाद भारत ने सिंधु जल संधि को निलंबित कर दिया है और अब पाकिस्तान चेनाब नदी के जलप्रवाह को लेकर चिंता जताता नजर आ रहा है। पाकिस्तान का दावा है कि भारत द्वारा जलप्रवाह में अचानक बदलाव किया जा रहा है, जिससे उसकी कृषि, खाद्य सुरक्षा और अर्थव्यवस्था पर खतरा मंडरा रहा है। इस्लामाबाद के विदेश कार्यालय ने इस संबंध में बयान जारी करते हुए भारत से एकतरफा जल प्रबंधन से बचने और संधि के प्रावधानों का पालन करने का आग्रह किया है। भारत की ओर से रुख स्पष्ट है – सीमा पार आतंकवाद के चलते पुराने समझौतों को उसी भावना से निभाया नहीं जा सकता।
इस बीच, भारत जम्मू-कश्मीर में चेनाब नदी पर 1,856 मेगावाट क्षमता वाली सावलकोट जलविद्युत परियोजना सहित कई योजनाओं को तेजी से आगे बढ़ा रहा है। भारत का कहना है कि पश्चिमी नदियों पर जलविद्युत उत्पादन सहित गैर-उपभोगात्मक उपयोग का पूरा अधिकार उसे है। विश्लेषकों के अनुसार, पाकिस्तान का यह विरोध तकनीकी चिंता नहीं, बल्कि रणनीतिक घबराहट का संकेत। पानी पर नियंत्रण के माध्यम से भारत ने स्पष्ट संदेश दे दिया है कि अब संधियाँ व्यवहार पर जीवित रहती हैं और रणनीतिक सहनशीलता की सीमा पार हो चुकी है। पाकिस्तान के लिए विकल्प स्पष्ट है – आतंकवाद पर नियंत्रण और वास्तविक शांति की पहल करना, अन्यथा भारत की जल-रणनीति और अधिक संगठित और प्रभावी होती जाएगी।









