भारत की हवाई सुरक्षा को बड़ी मजबूती देते हुए बेंगलुरु स्थित रक्षा उपकरण निर्माता अल्फा डिजाइन टेक्नोलॉजीज लिमिटेड (ADTL) ने भारतीय वायुसेना के लगभग 50 साल पुराने पेचोरा सतह से हवा में मार करने वाले मिसाइल सिस्टम का सफलतापूर्वक स्वदेशी अपग्रेड पूरा कर लिया है। इस आधुनिकीकरण के बाद पेचोरा सिस्टम पूरी तरह डिजिटल हो गया है, जिससे इसकी मारक क्षमता, विश्वसनीयता और ऑपरेशनल दक्षता में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है।
अपग्रेडेड पेचोरा मिसाइल सिस्टम ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान अहम भूमिका निभाई थी। 7–8 मई 2025 की रात पाकिस्तान की ओर से किए गए ड्रोन और लोइटरिंग म्यूनिशन हमलों को नाकाम करने में पेचोरा ने OSA-AK, L-70, ZU-23, आकाश और S-400 जैसे अन्य एयर डिफेंस सिस्टम के साथ मिलकर एक मजबूत मल्टी-लेयर एयर डिफेंस ग्रिड तैयार किया, जिससे भारतीय हवाई क्षेत्र सुरक्षित रहा। 1970 के दशक में वायुसेना में शामिल किया गया पेचोरा सिस्टम समय के साथ तकनीकी रूप से पुराना हो चुका था। इसे देखते हुए सरकार ने इसके लाइफ एक्सटेंशन और स्वदेशी आधुनिकीकरण का फैसला लिया और सितंबर 2020 में ADTL के साथ 591.3 करोड़ रुपये का अनुबंध किया गया। इसके तहत रडार ट्रैकिंग सिस्टम का डिजिटाइजेशन, नए ट्रांसमीटर-रिसीवर, आधुनिक डिस्प्ले, हेल्थ मॉनिटरिंग सिस्टम और मैकेनिकल हिस्सों का उन्नयन किया गया।
डिफेंस सूत्रों के अनुसार, अपग्रेडेड सिस्टम के यूजर फायरिंग ट्रायल नवंबर से दिसंबर 2025 के बीच पोखरण रेंज में सफलतापूर्वक पूरे किए गए। यह पहली बार है जब किसी निजी भारतीय कंपनी ने रूसी मूल के पुराने मिसाइल सिस्टम का स्वदेशी तकनीक से सफल आधुनिकीकरण कर सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल का परीक्षण किया है। सूत्रों का कहना है कि यह अपग्रेडेड पेचोरा सिस्टम अब मिशन ‘सुदर्शन चक्र’ का अहम हिस्सा बनेगा, जिसका उद्देश्य ड्रोन से लेकर तेज रफ्तार लड़ाकू विमानों तक हर तरह के हवाई खतरे से निपटने के लिए मजबूत एयर डिफेंस शील्ड तैयार करना है। यह परियोजना न केवल भारत की सैन्य तैयारियों को मजबूत करती है, बल्कि आत्मनिर्भर भारत और वैश्विक रक्षा बाजार में भारत की भूमिका को भी नई पहचान देती है।









