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2028 से राफेल में लगेगी स्वदेशी ‘अस्त्र’ मिसाइल, भारतीय वायुसेना की ताकत बढ़ेगी

भारतीय वायुसेना अपनी राफेल लड़ाकू विमानों में साल 2028 से स्वदेशी अस्त्र Mk-1 और Mk-2 एयर-टू-एयर मिसाइल एकीकृत करने की तैयारी कर रही है। इससे वायुसेना की मारक क्षमता बढ़ेगी और विदेशी हथियारों पर निर्भरता कम होगी, जिससे रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता मजबूत होगी। अस्त्र Mk-1 मिसाइल पहले से ही सुखोई-30MKI और तेजस विमानों में इस्तेमाल हो रही है और इसकी मारक क्षमता 100 किलोमीटर से अधिक है। वहीं नई अस्त्र Mk-2 मिसाइल और भी ताकतवर होगी, जिसकी रेंज लगभग 160 किलोमीटर मानी जा रही है।

राफेल में मिसाइल को इंटीग्रेट करने के लिए फ्रांसीसी कंपनी दसॉल्ट एविएशन और थेल्स तकनीकी सहयोग देंगी, ताकि मिसाइल आधुनिक रडार और सिस्टम के साथ सही तरीके से काम करे। मिसाइल को सेवा में शामिल करने से पहले कंप्यूटर सिमुलेशन, उड़ान परीक्षण और अंत में लाइव फायरिंग जैसे कई चरणों में परीक्षण किए जाएंगे। सभी परीक्षण सफल होने के बाद ही अस्त्र मिसाइल को पूरी तरह से राफेल में लगाया जाएगा।

विशेषज्ञों का कहना है कि इस कदम से भारतीय वायुसेना की हवाई शक्ति और रणनीतिक ताकत दोनों में वृद्धि होगी और विदेशी मिसाइलों पर निर्भरता न्यूनतम हो जाएगी।