एस. जयशंकर ने स्पष्ट किया है कि भारत ऊर्जा आयात के मामलों में अपनी रणनीतिक स्वायत्तता से पीछे नहीं हटेगा। म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन के दौरान जोहान वाडेफुल के साथ चर्चा में उन्होंने कहा कि वैश्विक ऊर्जा बाजार बेहद जटिल है और भारतीय तेल कंपनियां उपलब्धता, कीमत और जोखिम के आधार पर निर्णय लेती हैं, न कि किसी राजनीतिक दबाव में।
यह बयान उस दावे के बीच आया है जिसमें कहा गया कि वाशिंगटन के साथ संभावित व्यापार समझौते के तहत भारत रूसी तेल आयात घटा सकता है। हालांकि भारत ने इस पर आधिकारिक पुष्टि या खंडन नहीं किया है। हाल ही में नरेंद्र मोदी और डोनाल्ड ट्रम्प के बीच हुई बातचीत के बाद अमेरिकी शुल्क 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया। पहले लगाया गया 25 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क रूस से तेल खरीद के मुद्दे से जुड़ा बताया गया था।









