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गणतंत्र दिवस पर भारत का हाइपरसोनिक पावर शो, पहली बार दिखेगी स्वदेशी LRAShM मिसाइल

भारत अपनी रक्षा क्षमताओं में एक नया अध्याय जोड़ने जा रहा है। इस बार 26 जनवरी की परेड में कर्तव्य पथ पर पहली बार DRDO द्वारा विकसित लॉन्ग-रेंज एंटी-शिप हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल (LRAShM) को देश-दुनिया के सामने प्रदर्शित किया जाएगा। यह मिसाइल भारतीय नौसेना के लिए तैयार की गई है और इसे समुद्री युद्ध क्षमता में बड़ा गेम-चेंजर माना जा रहा है।

LRAShM की सबसे बड़ी ताकत इसकी 1500 किलोमीटर तक की मारक क्षमता और हाइपरसोनिक गति है। यह मिसाइल महज 15 मिनट में अपने लक्ष्य तक पहुंच सकती है, जिससे दुश्मन के रडार और डिफेंस सिस्टम को प्रतिक्रिया का मौका तक नहीं मिलेगा। यह अत्याधुनिक मिसाइल विभिन्न प्रकार के पेलोड ले जाने में सक्षम है और बड़े से बड़े युद्धपोत को नष्ट करने की क्षमता रखती है। DRDO के अनुसार, यह मिसाइल हवा में ग्लाइड करते हुए अत्यंत तेज रफ्तार बनाए रखती है, जिससे इसे ट्रैक करना और रोकना बेहद मुश्किल हो जाता है। इसके जरिए भारत हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी रणनीतिक बढ़त को और मजबूत करेगा।

यह उपलब्धि भारत को उन चुनिंदा देशों की कतार में खड़ा करती है जिनके पास स्वदेशी हाइपरसोनिक तकनीक है। गणतंत्र दिवस पर LRAShM का प्रदर्शन केवल सैन्य ताकत का प्रदर्शन नहीं, बल्कि ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ का वैश्विक संदेश भी होगा।