वित्त वर्ष 2025-26 की दूसरी तिमाही में भारतीय अर्थव्यवस्था ने उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन करते हुए 8.2% की मजबूत GDP ग्रोथ दर्ज की है। यह पिछले छह क्वार्टर का सबसे ऊंचा स्तर है और पिछली तिमाही के 7.8% की तुलना में भी तेज बढ़त दिखाता है। विशेषज्ञ जहां 7–7.3% की वृद्धि की उम्मीद कर रहे थे, वहीं वास्तविक आंकड़ों ने ग्रामीण मांग, घरेलू खपत और सरकारी खर्च की मजबूती को स्पष्ट रूप से साबित किया है। सितंबर में आवश्यक उपभोक्ता वस्तुओं पर GST घटाने से FMCG और किराना सेगमेंट में बिक्री बढ़ी, जिससे त्योहारी सीजन से पहले बाजार में अतिरिक्त मांग पैदा हुई। सरकार का दावा है कि GST राहत से उपभोक्ताओं के पास लगभग 2 लाख करोड़ रुपये की बचत होगी, जिसका सकारात्मक प्रभाव अर्थव्यवस्था पर दिखना शुरू हो चुका है।
सेक्टर-वार आंकड़ों में कृषि क्षेत्र ने 3.5% की वृद्धि के साथ स्थिर प्रदर्शन किया, जबकि माइनिंग लगभग स्थिर रही। इसके विपरीत मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर 9.1% की तेज रफ्तार से बढ़ा, जो पिछले वर्ष की तुलना में बड़ा सुधार है। बिजली और औद्योगिक क्षेत्र ने भी 8% से अधिक की वृद्धि दर्ज की। सर्विस सेक्टर ने 9.2% ग्रोथ के साथ अर्थव्यवस्था को अतिरिक्त गति दी। ग्रोथ के पीछे तीन मुख्य कारक रहे—ग्रामीण क्षेत्रों की सुधरती अर्थव्यवस्था, सरकारी कैपिटल खर्च और निर्यात में सुधार। हालांकि निजी निवेश अभी भी धीमा है, लेकिन घरेलू खपत 60% हिस्सेदारी के साथ अर्थव्यवस्था को स्थिर समर्थन दे रही है।









