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भारतीय पासपोर्ट की रैंकिंग में गिरावट, 2004 के मुकाबले 5 पायदान नीचे फिसला

दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल भारत के लिए यह साल एक निराशाजनक खबर लेकर आया है। हेनली पासपोर्ट इंडेक्स 2025 के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, भारतीय पासपोर्ट की रैंकिंग 85वें स्थान पर पहुंच गई है, जो पिछले वर्ष के 80वें स्थान से 5 पायदान नीचे है। इसका मतलब है कि भारतीय नागरिक अब केवल 57 देशों में वीजा-मुक्त या वीजा-ऑन-अराइवल यात्रा कर सकते हैं — जबकि 2024 में यह संख्या 62 थी।

छोटे देशों से भी पीछे भारत

रिपोर्ट के अनुसार, भारत जैसी बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देश का पासपोर्ट कई छोटे देशों से भी कमजोर है। उदाहरण के लिए, रवांडा (78वां), घाना (74वां) और अजरबैजान (72वां) भारत से आगे हैं। वहीं, एशियाई देश सिंगापुर, जापान और दक्षिण कोरिया लगातार शीर्ष स्थानों पर बने हुए हैं।

सिंगापुर फिर शीर्ष पर

इस साल भी सिंगापुर पहले स्थान पर है — उसके नागरिक 193 देशों में बिना वीजा यात्रा कर सकते हैं। दक्षिण कोरिया (190 देश) और जापान (189 देश) क्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान पर हैं। इसके मुकाबले, भारतीय पासपोर्ट धारक मॉरिटानिया के बराबर हैं, दोनों को 85वां स्थान मिला है।

पासपोर्ट रैंकिंग का क्या मतलब है?

पासपोर्ट की रैंक केवल यात्रा सुविधा नहीं, बल्कि किसी देश की सॉफ्ट पावर और वैश्विक प्रभाव को भी दर्शाती है। हेनली एंड पार्टनर्स द्वारा जारी यह इंडेक्स IATA (इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन) के आंकड़ों पर आधारित है, जो 227 गंतव्यों पर वीजा-मुक्त पहुंच को मापता है।

मजबूत पासपोर्ट का अर्थ है अधिक यात्रा स्वतंत्रता, बेहतर व्यापारिक अवसर और आसान वैश्विक गतिशीलता। वहीं, कमजोर पासपोर्ट का मतलब है — ज्यादा कागजी प्रक्रिया, ऊंचे वीजा शुल्क और लंबा इंतजार।

क्यों गिरी भारत की रैंकिंग?

रिपोर्ट के मुताबिक, जुलाई 2025 में भारत 77वें स्थान पर था, जब भारतीय नागरिक 59 देशों में वीजा-फ्री यात्रा कर सकते थे। लेकिन अक्टूबर तक दो देशों ने यह सुविधा वापस ले ली, जिससे रैंकिंग गिर गई।

भारत के पूर्व राजदूत अचल मल्होत्रा का कहना है कि पासपोर्ट की ताकत पर आर्थिक स्थिरता, राजनीतिक माहौल और इमिग्रेशन नीतियों का बड़ा असर पड़ता है। उन्होंने बताया कि 1970 के दशक में भारतीयों को कई पश्चिमी देशों में बिना वीजा यात्रा की अनुमति थी, लेकिन 1980 के दशक में आंतरिक अस्थिरता और प्रवासन बढ़ने से स्थिति बदल गई।

वीजा नीतियों में सख्ती और छवि की चुनौती

कई पश्चिमी देशों ने अवैध प्रवास और ओवरस्टे की बढ़ती घटनाओं के कारण भारतीय यात्रियों पर वीजा नियम सख्त किए हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर चर्चाओं में यह भी सामने आया है कि कुछ देशों को भारतीय पर्यटकों की सांस्कृतिक असंवेदनशीलता और बारगेनिंग आदतों को लेकर आशंकाएं हैं।

यात्रियों पर असर

भारतीय यात्रियों को अब वीजा प्रक्रिया में 15 से 30 दिन का समय, 5,000 से 10,000 रुपये तक की लागत और रिजेक्शन का जोखिम झेलना पड़ता है। कई ट्रैवल इन्फ्लुएंसर्स का कहना है कि भारतीय पासपोर्ट के साथ यूरोप या पश्चिमी देशों में यात्रा करना अब “सपना और संघर्ष दोनों” बन गया है।

ई-पासपोर्ट योजना से उम्मीदें

हालांकि, भारत सरकार ने हाल ही में ई-पासपोर्ट योजना शुरू की है। इसमें एक इलेक्ट्रॉनिक चिप लगी होती है जो बायोमेट्रिक जानकारी स्टोर करती है, जिससे पासपोर्ट को नकली बनाना या छेड़छाड़ करना मुश्किल हो जाता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन भारत को अपनी वैश्विक स्थिति मजबूत करने के लिए अधिक कूटनीतिक साझेदारियां और वीजा समझौते करने होंगे।