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रूबल नागी को मिला शिक्षण जगत का ‘नोबेल पुरस्कार’ GEMS, भारत में शिक्षा में किया बदलाव

मुंबई की कला और सामाजिक विज्ञान शिक्षिका रूबल नागी को ग्लोबल टीचर प्राइज 2026 (GEMS) से सम्मानित किया गया है। इस पुरस्कार को शिक्षण जगत का ‘नोबेल पुरस्कार’ भी कहा जाता है और रूबल को यह 10 लाख डॉलर की राशि सहित दिया गया। अवॉर्ड की घोषणा दुबई में आयोजित विश्व सरकार शिखर सम्मेलन में की गई। रूबल नागी एक शिक्षाविद, समाजिक कार्यकर्ता और कलाकार हैं। उन्होंने भारत में 800 से अधिक सामुदायिक शिक्षण केंद्र स्थापित किए हैं, खासकर उन इलाकों में जहां बच्चे कभी स्कूल नहीं पहुंच पाते थे।

रूबल ने बच्चों को पढ़ाने के लिए दीवारों पर इंटरैक्टिव म्यूरल्स (चित्र) बनाए, जिनमें साक्षरता, गणित, विज्ञान, इतिहास, स्वास्थ्य और पर्यावरण जैसे विषय रंगों और रूपकों के माध्यम से सिखाए जाते हैं। इसे उन्होंने ‘लिविंग वॉल्स ऑफ लर्निंग’ नाम दिया। उनके इस अनोखे मॉडल से बच्चे पढ़ाई के प्रति उत्साहित होते हैं और यह माता-पिता व समुदाय के लिए भी आकर्षक है।

रूबल नागी का शिक्षा मॉडल उन बच्चों पर केंद्रित है जो गरीबी, बाल मजदूरी या अनियमित स्कूलिंग जैसी चुनौतियों से जूझते हैं। इसमें पढ़ाई का समय बच्चों की सुविधा के अनुसार रखा गया है, ताकि शिक्षा उनके जीवन की मजबूरी से टकराए नहीं। इस मॉडल में महंगी किताबों की जगह रोजमर्रा की चीजों, पुराने कागज, बोतलें और दीवारों पर चित्र का उपयोग किया जाता है। बच्चे देखने, छूने और प्रयोग करने के माध्यम से सीखते हैं, जिससे जानकारी लंबे समय तक याद रहती है।

रूबल नागी की मेहनत और नवाचार ने भारतीय शिक्षा में एक नई क्रांति ला दी है और उन्हें इस वैश्विक सम्मान से नवाजा गया है।