भारत और अमेरिका के बीच रक्षा क्षेत्र में सहयोग एक नए मुकाम पर पहुंच गया है। अमेरिकी कंपनी GE Aerospace और भारत की Hindustan Aeronautics Limited (HAL) ने मिलकर F414 जेट इंजन के संयुक्त उत्पादन को लेकर महत्वपूर्ण तकनीकी सहमति हासिल की है। यह समझौता लंबे समय से चल रही वार्ताओं के बाद संभव हुआ है और इसे भारत के रक्षा आत्मनिर्भरता अभियान के लिए एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
यह इंजन भारत के भविष्य के लड़ाकू विमान कार्यक्रमों जैसे एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) और LCA Mk2 के लिए अहम भूमिका निभाएगा। देश में ही इन इंजनों के निर्माण से न केवल तकनीकी क्षमता बढ़ेगी, बल्कि विदेशी निर्भरता में भी कमी आएगी। इससे “मेक इन इंडिया” पहल को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
इसके अलावा, GE Aerospace ने Indian Air Force के साथ एक और महत्वपूर्ण समझौता किया है। इसके तहत LCA तेजस में इस्तेमाल होने वाले F404-IN20 इंजनों के लिए भारत में एक विशेष मेंटेनेंस और रिपेयर सुविधा स्थापित की जाएगी। इस डिपो का संचालन भारतीय वायु सेना करेगी, जबकि तकनीकी सहयोग और प्रशिक्षण GE द्वारा प्रदान किया जाएगा।
इस पहल से जेट इंजनों की मरम्मत और रखरखाव में तेजी आएगी, जिससे लड़ाकू विमानों की उपलब्धता और संचालन क्षमता में सुधार होगा। कुल मिलाकर, यह साझेदारी भारत की रक्षा उत्पादन क्षमता को नई दिशा देने के साथ-साथ उसे वैश्विक स्तर पर और मजबूत बनाएगी।









