2026 में भारत के आसमान में दो महत्वपूर्ण खगोलीय घटनाएं देखने को मिलेंगी। पहला सूर्य ग्रहण जो 17 फरवरी को लगेगा और दूसरा चंद्र ग्रहण जो 3 मार्च को दिखाई देगा। हालांकि सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, लेकिन चंद्र ग्रहण भारत में शाम 6:26 बजे से 6:46 बजे तक देखा जा सकेगा।
सूर्य ग्रहण तब होता है जब चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य के बीच आ जाता है और पृथ्वी पर अपनी छाया डालता है। ज्योतिषीय दृष्टि से सूर्य आत्मा, आत्मविश्वास और स्वास्थ्य का कारक माना जाता है। वहीं, चंद्र ग्रहण पूर्णिमा के समय पड़ता है जब पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर आती है। यह भावनाओं, मानसिक स्थिति और कर्मों के शुद्धिकरण का प्रतीक है।
ग्रहण के दौरान सूतक काल का पालन करना चाहिए। इस समय पूजा-पाठ और अनुष्ठान अशुभ माने जाते हैं। लेकिन आध्यात्मिक साधना, मंत्र जाप और ध्यान करना शुभ है। ग्रहण से पहले और बाद में स्नान करने और दान-पुण्य करने की सलाह दी जाती है। दान में दूध, सात तरह के अनाज, सफेद कपड़े या काले कपड़े शामिल हो सकते हैं। ये खगोलीय घटनाएं जीवन में मानसिक और भावनात्मक बदलाव ला सकती हैं, इसलिए विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि ग्रहण के समय सतर्कता और ध्यान बनाए रखा जाए।









