विशाखापत्तनम में 15 से 25 फरवरी 2026 तक भारतीय नौसेना इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू (IFR) की मेजबानी करने जा रही है, जो भारत की बढ़ती समुद्री शक्ति और वैश्विक कूटनीति का बड़ा प्रदर्शन होगा। इस भव्य आयोजन में 70 से अधिक देशों के युद्धपोत और हजारों नौसैनिक हिस्सा लेंगे। फ्लीट रिव्यू के दौरान भारत की सुप्रीम कमांडर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू प्रेसिडेंशियल यॉट से समुद्र में निकलकर बेड़े का निरीक्षण करेंगी। इस दौरान अलग-अलग देशों के वॉरशिप और नौसैनिक उन्हें सलामी देंगे, जो भारत की समुद्री क्षमता और अंतरराष्ट्रीय सहयोग का प्रतीक होगा।
इस आयोजन की खास बात यह है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव के बावजूद रूस और अमेरिका के युद्धपोत एक ही कतार में नजर आएंगे। रूस की ओर से फ्रिगेट RFS मार्शल शापोशनिकोव और अमेरिका की ओर से गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर USS पिंकनी शामिल होगा। ईरान का फ्रिगेट ‘डेना’ भी इस परेड का हिस्सा बनेगा। कुल 137 देशों को निमंत्रण भेजा गया था, जिनमें से 70 से अधिक देशों ने भागीदारी की पुष्टि की है। भारतीय नौसेना के 70 से ज्यादा युद्धपोत और पनडुब्बियां तथा 20 से अधिक विदेशी जंगी जहाज विशाखापत्तनम पहुंचेंगे।
इस बार कुछ देश पहली बार हिस्सा ले रहे हैं। इनमें फिलीपींस का गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट ‘मिगेल मालवार’ और यूएई का वॉरशिप ‘अल अमारात’ शामिल हैं। जर्मनी का लॉन्ग रेंज मैरीटाइम पेट्रोल एयरक्राफ्ट P-8 भी पहली बार फ्लाई-पास्ट में दिखाई देगा। भारत की समुद्री कूटनीति लगातार मजबूत हो रही है। साल 2001 में पहला इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू आयोजित हुआ था, जिसमें 20 देशों के 97 युद्धपोत शामिल हुए थे। वहीं 2016 में विशाखापत्तनम में हुए दूसरे IFR में 50 देशों के करीब 100 वॉरशिप शामिल हुए थे। अब 2026 का आयोजन पहले से कहीं ज्यादा बड़ा और भव्य होने जा रहा है।









