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भारत ने बांग्लादेश के शेख हसीना प्रत्यर्पण अनुरोध पर कहा-कानूनी समीक्षा जारी

भारत सरकार बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के प्रत्यर्पण अनुरोध पर कानूनी और न्यायिक समीक्षा कर रही है। विदेश मंत्रालय के अनुसार यह मामला भारत की आंतरिक कानूनी प्रक्रियाओं के तहत जांचा जा रहा है। भारत दोनों देशों के लोगों के व्यापक हितों — शांति, लोकतंत्र, समावेशिता और स्थिरता — के लिए प्रतिबद्ध है।

बांग्लादेश की एक विशेष अदालत ने हसीना को पिछले साल छात्रों के नेतृत्व में हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान कथित क्रूर दमन के लिए गैरमौजूदगी में ‘मानवता के खिलाफ अपराध’ के तहत मृत्युदंड सुनाया था। उनके करीबी सहयोगी और पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमां खान कमाल को भी इसी आरोप में मौत की सजा दी गई। इसके बाद बांग्लादेश सरकार ने भारत से दोनों के प्रत्यर्पण की औपचारिक मांग की।

विदेश मंत्रालय प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि यह अनुरोध न्यायिक और कानूनी प्रक्रिया के दायरे में है और भारत बांग्लादेश में शांति तथा लोकतंत्र के लिए रचनात्मक संवाद बनाए रखेगा। हसीना का पक्ष है कि यह सजा एक ‘गैर-कानूनी न्यायाधिकरण’ द्वारा दी गई, जिसकी स्थापना एक निर्वाचित जनादेशविहीन अंतरिम सरकार ने की थी। मामला तब सामने आया है जब फरवरी 2026 में बांग्लादेश में संसदीय चुनाव होने हैं और उनकी पार्टी अवामी लीग को फिलहाल चुनाव लड़ने से रोका गया है।