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AH-64E अपाचे अटैक हेलिकॉप्टर की अंतिम खेप भारत को मिली, सीमाओं पर बढ़ेगी सेना की मारक क्षमता

भारत को अमेरिका से AH-64E अपाचे अटैक हेलिकॉप्टरों की अंतिम खेप प्राप्त हो चुकी है, जिसके साथ ही वर्ष 2020 में हुए 796 मिलियन डॉलर के समझौते के तहत छह हेलिकॉप्टरों की आपूर्ति पूरी हो गई है। इस डील को भारतीय सेना की हवाई युद्ध क्षमता के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। अपाचे हेलिकॉप्टरों के शामिल होने से सेना को आधुनिक युद्ध परिदृश्य में निर्णायक बढ़त मिलने की उम्मीद है, खासकर तब जब क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियां लगातार बनी हुई हैं।

हालांकि इन हेलिकॉप्टरों की डिलीवरी तय समय से काफी बाद में हुई। शुरुआत में इन्हें 2024 की शुरुआत में भारत पहुंचना था, लेकिन पहली खेप जुलाई 2025 में आई। इसके बाद कुछ ही समय के अंतराल में शेष हेलिकॉप्टर भी भारत को सौंप दिए गए और अब यह सौदा औपचारिक रूप से पूरा हो गया है। सेना सूत्रों के अनुसार, इन अपाचे हेलिकॉप्टरों को रणनीतिक रूप से पाकिस्तान सीमा के पास तैनात किया जा सकता है।

AH-64E अपाचे को दुनिया के सबसे घातक अटैक हेलिकॉप्टरों में शामिल किया जाता है। यह 30 मिमी की चेन गन, हेलफायर एंटी-टैंक मिसाइलों और उन्नत रॉकेट सिस्टम से लैस है, जिससे यह दुश्मन के टैंक, बख्तरबंद वाहन और अग्रिम ठिकानों को बेहद सटीकता से निशाना बना सकता है। इसमें लगा आधुनिक लॉन्गबो रडार एक साथ कई लक्ष्यों को पहचानने और प्राथमिकता तय करने में सक्षम है। इसके अलावा थर्मल इमेजिंग और नाइट विजन जैसी प्रणालियां इसे दिन-रात और हर मौसम में प्रभावी बनाती हैं।

अपाचे की खासियत यह भी है कि यह बेहद नीचे उड़ान भरते हुए दुश्मन की निगरानी प्रणालियों से बच सकता है। सीमावर्ती इलाकों में इसकी तैनाती से सेना को त्वरित प्रतिक्रिया देने की क्षमता मिलेगी और जमीनी बलों को मजबूत हवाई समर्थन प्राप्त होगा, जिससे भारत की रक्षा तैयारियां और अधिक सशक्त होंगी।