मई 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच चार दिन चले सैन्य तनाव के बाद अब कूटनीतिक मोड़ आया है। पाकिस्तान ने पहली बार सार्वजनिक रूप से चीन के दावे का समर्थन किया कि बीजिंग ने इस दौरान मध्यस्थता की भूमिका निभाई। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने कहा कि 7 से 10 मई के बीच चीन ने दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व से संपर्क किया और इन संवादों ने तनाव कम करने और क्षेत्र में शांति बहाल करने में मदद की। उन्होंने इसे सकारात्मक कूटनीतिक प्रयास करार दिया। हालांकि, पाकिस्तान का यह बयान कई सवाल खड़े कर रहा है क्योंकि अब तक पाकिस्तान संघर्ष विराम का श्रेय पूरी तरह से अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को देता रहा था। इस नई स्थिति ने कूटनीतिक हलकों में हैरानी पैदा की है।
भारत का रुख स्पष्ट है कि संघर्ष विराम किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता का परिणाम नहीं था। नई दिल्ली के अनुसार, भारत ने अपनी सैन्य कार्रवाई रोकने का निर्णय पाकिस्तान के डीजीएमओ से संवाद के बाद लिया। भारत ने चीन के दावे को भी खारिज किया था। इस बीच, चीन और अमेरिका के बीच बयानबाजी से यह मामला और जटिल हो गया है, क्योंकि अमेरिका लगातार अपनी मध्यस्थता की भूमिका का दावा करता रहा। पाकिस्तान का हालिया बयान इस कूटनीतिक गतिरोध को और बढ़ा रहा है।









