स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के रिसर्च डिपार्टमेंट की ताज़ा रिपोर्ट बताती है कि भारत वैश्विक आर्थिक मानचित्र पर तेज़ी से अपनी स्थिति मज़बूत कर रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, मौजूदा रफ्तार बनी रही तो 2028 तक भारत जर्मनी को पीछे छोड़ते हुए दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है। इसके साथ ही 2030 तक भारत “अपर मिडिल इनकम” श्रेणी में प्रवेश कर सकता है, जो देश की विकास यात्रा में एक बड़ा मोड़ होगा।
इस अनुमान का आधार है भारत की बढ़ती नॉमिनल जीडीपी और प्रति व्यक्ति सकल राष्ट्रीय आय (Per Capita GNI)। SBI का आकलन है कि 2030 तक प्रति व्यक्ति आय 4,000 से 4,500 डॉलर के बीच पहुंच सकती है। विश्व बैंक की मौजूदा वर्गीकरण प्रणाली के तहत यह स्तर किसी देश को अपर मिडिल इनकम कैटेगरी में शामिल करने के लिए पर्याप्त माना जाता है।
भारत की आय वृद्धि का सफर लंबा रहा है। 1960 के दशक में जहां प्रति व्यक्ति आय दो अंकों में थी, वहीं 2007 में भारत लोअर मिडिल इनकम देशों में शामिल हुआ। 2019 तक यह लगभग 2,000 डॉलर के आसपास पहुंची और आने वाले वर्षों में इसके और तेज़ होने का अनुमान है। रिपोर्ट का कहना है कि अब यह बढ़ोतरी केवल चक्रीय नहीं, बल्कि संरचनात्मक बदलावों का नतीजा है।
वैश्विक परिदृश्य में भी भारत की भूमिका मजबूत हुई है। बीते एक दशक में भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में रहा है। इसी कारण 1990 में जहां भारत नॉमिनल जीडीपी के आधार पर 14वें स्थान पर था, वहीं 2025 तक वह चौथे पायदान पर आ चुका है।
SBI का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2028 तक भारत की अर्थव्यवस्था 5 ट्रिलियन डॉलर के स्तर को पार कर सकती है और 2036 तक 10 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने की क्षमता रखती है। यदि यही गति बनी रही, तो 2047 तक भारत के हाई इनकम देश बनने की संभावना भी व्यक्त की गई है, बशर्ते प्रति व्यक्ति आय में तेज़ और स्थिर वृद्धि जारी रहे।









