मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच शांति की दिशा में अमेरिका ने एक बड़ा कदम उठाया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गाज़ा युद्ध को स्थायी रूप से समाप्त करने के उद्देश्य से ‘गाज़ा बोर्ड ऑफ पीस’ के गठन की घोषणा की है। इस पहल की सबसे अहम बात यह है कि अमेरिका ने भारत को इस बोर्ड में शामिल होने के लिए औपचारिक निमंत्रण भेजा है। अमेरिका के नए राजदूत सर्जियो गौर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को राष्ट्रपति ट्रंप का संदेश सौंपते हुए इसकी जानकारी दी। इसे वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती भूमिका और भरोसे का संकेत माना जा रहा है।
ट्रंप ने इस शांति योजना को असाधारण बताते हुए कहा है कि अब इसे ज़मीन पर लागू करने का समय आ गया है। हालांकि तुर्किये और कतर को शामिल किए जाने पर इज़राइल ने आपत्ति जताई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बोर्ड केवल गाज़ा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भविष्य में बड़े अंतरराष्ट्रीय संघर्षों के समाधान का मंच बन सकता है, जिसे कुछ लोग संयुक्त राष्ट्र के विकल्प के रूप में भी देख रहे हैं।
इस बोर्ड के कार्यकारी पैनल में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो, विशेष दूत स्टीव विटकॉफ, उद्योगपति मार्क रोवन, ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर और विश्व बैंक प्रमुख अजय बंगा जैसे नाम शामिल हैं। बोर्ड की औपचारिक घोषणा दावोस में होने वाले वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के दौरान होने की संभावना है। पाकिस्तान समेत कई अन्य देशों को भी इसमें शामिल होने का न्योता मिला है, जबकि इज़राइल ने इसकी संरचना पर सवाल उठाए हैं।









