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भारत-यूरोप फ्री ट्रेड डील अंतिम दौर में, ट्रंप टैरिफ से हुए नुकसान की हो सकती है पूरी भरपाई

भारत और यूरोपीय संघ के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौता अब निर्णायक चरण में पहुंच चुका है। यदि यह समझौता पूरा होता है, तो इससे भारतीय निर्यात को बड़ा सहारा मिल सकता है और अमेरिका द्वारा लगाए गए भारी टैरिफ से हुए नुकसान की भरपाई संभव हो सकेगी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले साल भारत से अमेरिका जाने वाले उत्पादों पर कुल 50 प्रतिशत तक टैरिफ लगाया था, जिससे भारतीय निर्यातकों को करीब 6 अरब डॉलर का झटका लगा था।

अब भारत यूरोप के साथ एक ऐसी डील की तैयारी में है, जिससे एक साथ 27 देशों के बाजारों तक आसान पहुंच मिल सकेगी। माना जा रहा है कि भारत और यूरोपीय संघ 27 जनवरी को इस फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर कर सकते हैं। इसे दोनों पक्ष ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ कह रहे हैं, क्योंकि इसके तहत भारत को यूरोप में बड़े पैमाने पर शुल्क छूट मिलेगी।

विशेषज्ञों के मुताबिक, इस समझौते के बाद भारत का यूरोप के साथ व्यापार अधिशेष 2031 तक करीब 50 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। भारतीय निर्यात में यूरोप की हिस्सेदारी भी 22–23 प्रतिशत तक बढ़ने का अनुमान है। इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी और केमिकल सेक्टर को इससे सबसे अधिक फायदा मिलने की उम्मीद है। यूरोप भी चीन पर निर्भरता घटाने और वैकल्पिक सप्लाई चेन के तौर पर भारत की ओर तेजी से बढ़ रहा है, जिससे दोनों पक्षों के लिए यह सौदा अहम माना जा रहा है।