भारत ने अपनी हवाई सुरक्षा क्षमताओं को नई ऊंचाई पर ले जाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। Defence Research and Development Organisation (DRDO) ने अपने स्वदेशी लंबी दूरी के एयर डिफेंस प्रोजेक्ट कुशा (Extended Range Air Defence System – ERADS) के पहले विकास परीक्षणों को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। इस सफलता के साथ ही प्रोजेक्ट अब अगले चरण “इंटीग्रेटेड फ्लाइट टेस्ट” की ओर बढ़ रहा है, जो इस साल होने की उम्मीद है।
प्रोजेक्ट कुशा में DRDO के साथ Bharat Electronics Limited (BEL) भी महत्वपूर्ण योगदान दे रही है। हालिया परीक्षणों में ग्राउंड वैलिडेशन और ड्यूल-पल्स रॉकेट मोटर जैसे प्रमुख घटकों की सफलता ने इस सिस्टम की विश्वसनीयता को साबित किया।
यह सिस्टम तीन-स्तरीय मिसाइल रक्षा प्रणाली पर आधारित है। M1 मिसाइल 150 किमी तक की रेंज में फाइटर जेट और प्रिसिजन हथियारों को इंटरसेप्ट करेगी, M2 मिसाइल 250 किमी की रेंज में उच्च सटीकता वाली AESA तकनीक के साथ काम करेगी, और M3 मिसाइल 350–400 किमी से अधिक रेंज में बड़े और हाई-वैल्यू टारगेट जैसे AWACS और बैलिस्टिक मिसाइलों को निशाना बनाएगी।
प्रोजेक्ट कुशा की खासियत इसकी मल्टी-लेयर डिफेंस क्षमता है, जो स्टील्थ फाइटर, ड्रोन, क्रूज़ मिसाइल और बैलिस्टिक मिसाइल जैसे खतरों को कई स्तरों पर रोक सकेगी। भारतीय वायुसेना ने इसके लिए पहले ही कई स्क्वाड्रन की आवश्यकता को मंजूरी दी है।
तैनाती की योजना के अनुसार 2026 में फ्लाइट टेस्ट शुरू होंगे, 2028 तक शुरुआती ऑपरेशनल तैनाती होगी, और 2030 तक पूर्ण तैनाती का लक्ष्य है। यह प्रोजेक्ट भारत के मिशन सुदर्शन चक्र का हिस्सा है और देश को उन्नत एयर डिफेंस तकनीक में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में अहम साबित होगा।









