आयकर विभाग ने ‘इनकम टैक्स रूल्स 2026’ का ड्राफ्ट जारी कर भारत की टैक्स प्रणाली में बड़े बदलाव की तैयारी पूरी कर ली है। यह नया कानून 1 अप्रैल, 2026 से लागू होगा और 1962 के पुराने नियमों की जगह लेगा। इस ड्राफ्ट के तहत टैक्सपेयर्स के लिए फॉर्म्स को ‘स्मार्ट’ बनाया गया है। इनमें ऑटोमेटेड रिकांसिलेशन और प्री-फिल फीचर्स होंगे, जिससे टैक्स फाइल करना आसान और त्रुटि रहित होगा।
सबसे अहम बदलाव है ‘नियम 57’। इसके अनुसार अब ज्वैलरी, पेंटिंग, स्कल्पचर और अचल संपत्ति की फेयर मार्केट वैल्यू (FMV) तय करने का तरीका स्पष्ट किया गया है:
- ज्वैलरी: ओपन मार्केट कीमत या रजिस्टर्ड डीलर से खरीदी गई कीमत मान्य होगी। 50,000 रुपये से ऊपर की वैल्यू के लिए रजिस्टर्ड वैल्यूअर की रिपोर्ट जरूरी।
- पेंटिंग और आर्टवर्क: ज्वैलरी जैसे नियम लागू होंगे।
- जमीन और बिल्डिंग: स्टांप ड्यूटी के आधार पर वैल्यू तय होगी।
- अन्य संपत्तियां: ओपन मार्केट कीमत को ही वैल्यू माना जाएगा।
नियम 6 में होल्डिंग पीरियड की कैलकुलेशन को भी स्पष्ट किया गया है, ताकि शेयर, डिबेंचर, विदेशी कंपनी की संपत्ति और इम movable प्रॉपर्टी की गणना आसान हो।
इसके अलावा, अकाउंटेंट और वैल्यूअर की योग्यता और अनुभव को भी अपडेट किया गया है। नए नियमों के तहत वैल्यूएशन प्रमाणपत्र देने वाले प्रोफेशनल के पास कम से कम 10 साल का अनुभव होना चाहिए और सालाना रसीद की न्यूनतम सीमा तय की गई है। ड्राफ्ट जनता के सुझावों के लिए पब्लिक डोमेन में रखा गया है। सभी स्टेकहोल्डर्स 22 फरवरी, 2026 तक अपनी राय दे सकते हैं। कुल मिलाकर, नए नियमों से टैक्स फाइलिंग आसान, पारदर्शी और संपत्ति वैल्यूएशन भरोसेमंद होगी, जिससे टैक्सपेयर्स को सुविधा और सुविधा बढ़ेगी।









