आई-पैक छापेमारी से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान ममता बनर्जी सरकार के लिए स्थिति असहज नजर आई। अदालत ने इस बात को स्वीकार किया कि केंद्रीय जांच एजेंसी की कार्रवाई में राज्य की ओर से हस्तक्षेप की कोशिश की गई। प्रवर्तन निदेशालय की तरफ से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी कि छापेमारी के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी स्वयं मौके पर पहुंचीं और फाइलें व अहम दस्तावेज ले जाए गए, जबकि राज्य के डीजीपी ने इसमें सहयोगी की भूमिका निभाई।
सुप्रीम कोर्ट ने ईडी अधिकारियों के खिलाफ दर्ज चार एफआईआर की कार्रवाई पर रोक लगा दी और साफ कहा कि राज्य सरकार या उसकी एजेंसियां केंद्रीय जांच में बाधा नहीं डाल सकतीं। कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार और पुलिस प्रशासन को नोटिस जारी कर दो सप्ताह में जवाब मांगा है। साथ ही डीजीपी राजीव कुमार और कोलकाता पुलिस कमिश्नर मनोज वर्मा के निलंबन की मांग पर केंद्र सरकार और राज्य से राय तलब की गई है। अदालत ने घटनास्थल से जुड़े सभी सीसीटीवी फुटेज और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड सुरक्षित रखने के निर्देश भी दिए, ताकि सबूतों से कोई छेड़छाड़ न हो। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी माना कि यह मामला कानून के शासन और संवैधानिक संस्थाओं की स्वतंत्रता से जुड़ा गंभीर मुद्दा है।









