भारत में होमस्टे पर्यटन तेजी से लोकप्रिय हो रहा है और इसे देखते हुए केंद्र सरकार ने राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों को इस क्षेत्र को व्यवस्थित और पर्यावरण के अनुकूल बनाने के निर्देश दिए हैं। नीति आयोग की एक नई रिपोर्ट में होमस्टे टूरिज्म को सिर्फ ठहरने की सुविधा नहीं, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था, संस्कृति और समुदाय से जुड़े अनुभव के रूप में विकसित करने पर जोर दिया गया है। रिपोर्ट के अनुसार देश में होमस्टे की मांग तो बढ़ी है, लेकिन अलग-अलग राज्यों में नियम, रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया और प्रोत्साहन नीतियां एक जैसी नहीं हैं, जिससे इस सेक्टर की पूरी क्षमता सामने नहीं आ पा रही है।
नीति आयोग ने राज्यों में अपनाई जा रही सफल व्यवस्थाओं को उदाहरण के रूप में पेश किया है। गुजरात, गोवा, केरल, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ और दिल्ली जैसे राज्यों ने होमस्टे के लिए सरल और डिजिटल रजिस्ट्रेशन सिस्टम लागू किए हैं। गोवा में सीमित दस्तावेजों के आधार पर पंजीकरण संभव है, जबकि केरल में निरीक्षण प्रक्रिया को व्यावहारिक बनाया गया है। छत्तीसगढ़ ने क्षेत्र और संस्कृति के आधार पर होमस्टे को अलग-अलग श्रेणियों में बांटा है और दिल्ली में होमस्टे को आवासीय इकाई मानते हुए बिजली, पानी और संपत्ति कर में राहत दी गई है।
रिपोर्ट में सिंगल-विंडो डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिये रजिस्ट्रेशन और अनुपालन प्रक्रिया को आसान बनाने की सिफारिश की गई है, ताकि लोगों पर प्रशासनिक बोझ कम हो और वे जल्दी संचालन शुरू कर सकें। इसके साथ ही कम विकसित क्षेत्रों में पर्यटन को बढ़ावा देने, समुदाय की भागीदारी बढ़ाने, स्थानीय कला, संस्कृति और अनुभव आधारित गतिविधियों को जोड़ने की रणनीति भी सुझाई गई है। सरकार का उद्देश्य होमस्टे पर्यटन को टिकाऊ, समावेशी और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध मॉडल के रूप में आगे बढ़ाना है, जिससे स्थानीय लोगों की आय बढ़े और पर्यावरण संतुलन भी बना रहे।









