ओडिशा के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल में स्थित प्राचीन खजाने की जांच और संरक्षण का ऐतिहासिक कार्य जल्द शुरू होने जा रहा है। सदियों पुरानी परंपराओं और धार्मिक आस्था के केंद्र में स्थित इस भंडार के कीमती आभूषणों की सूची बनाने और उनकी स्थिति का आकलन करने की प्रक्रिया 25 मार्च से आरंभ होगी। लगभग पांच दशक बाद हो रही यह गतिविधि श्रद्धालुओं और इतिहास प्रेमियों के बीच विशेष आकर्षण का विषय बनी हुई है।
प्रशासन ने बताया कि यह कार्य शुभ मुहूर्त में दोपहर 12:12 बजे से 1:45 बजे के बीच शुरू किया जाएगा। पूरी प्रक्रिया राज्य सरकार द्वारा निर्धारित मानक संचालन दिशा-निर्देशों के अनुसार संचालित की जाएगी। सुरक्षा और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए हर दिन काम समाप्त होने के बाद चाबियों को कोषागार में सुरक्षित रखा जाएगा। साथ ही पूरी कार्यवाही की वीडियो रिकॉर्डिंग भी की जाएगी ताकि भविष्य में किसी तरह का विवाद न हो।
श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए विशेष इंतजाम किए गए हैं। भक्तों को बैरिकेड के बाहर से ही दर्शन करने की अनुमति दी जाएगी। भीड़ नियंत्रण के लिए शनिवार और रविवार को यह कार्य स्थगित रखा जाएगा। इसके अलावा, जिन दिनों बड़े धार्मिक अनुष्ठान होंगे, उन दिनों भी जांच कार्य नहीं किया जाएगा। इसके लिए एक मासिक कार्य योजना तैयार की जाएगी और सेवायतों तथा मीडिया को समय-समय पर जानकारी दी जाएगी।
इस बार प्रक्रिया को आधुनिक बनाने के लिए डिजिटल रिकॉर्डिंग और ई-कैटलॉगिंग का भी उपयोग किया जाएगा। आभूषणों की फोटोग्राफी और विस्तृत डेटा संग्रहण से इस धरोहर के संरक्षण में मदद मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि यह कदम परंपरा और आधुनिक तकनीक के संतुलन का उदाहरण बनेगा।









