भारत और अमेरिका के बीच वायुसेना की ताकत बढ़ाने को लेकर एक महत्वपूर्ण रक्षा समझौता हुआ है, जिसके तहत हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) और अमेरिकी कंपनी GE एयरोस्पेस मिलकर भारत में ही उन्नत फाइटर जेट इंजन का निर्माण करेंगे। इस डील के साथ तकनीक हस्तांतरण (Technology Transfer) पर भी सहमति बन गई है, जिसे भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
इस समझौते के तहत GE एयरोस्पेस अपने अत्याधुनिक F414 इंजनों की डीप मैन्युफैक्चरिंग तकनीक भारत को उपलब्ध कराएगा। दोनों कंपनियों के बीच तकनीकी चर्चाओं का अहम चरण पूरा हो चुका है और अब कॉमर्शियल शर्तों पर बातचीत जारी है। उम्मीद है कि इसी वित्त वर्ष में अंतिम करार पर हस्ताक्षर हो जाएंगे। योजना के अनुसार, समझौते के दो साल के भीतर भारत में एक नई मैन्युफैक्चरिंग यूनिट स्थापित की जाएगी, जहां शुरुआती चरण में 99 इंजन बनाए जाएंगे। ये इंजन मुख्य रूप से लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (LCA) तेजस Mk2 और भविष्य के एडवांस मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) में उपयोग किए जाएंगे।
इसके अलावा, मौजूदा F404 इंजनों के रखरखाव के लिए भी भारत में एक डिपो सुविधा स्थापित की जाएगी, जिसका संचालन भारतीय वायुसेना के पास होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता न केवल भारत की वायुसेना की क्षमता बढ़ाएगा, बल्कि देश को रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी एक ऐतिहासिक कदम साबित होगा।









