Himachal

हिमाचल की बेटी रेणुका ठाकुर आज लौटेंगी घर, मां के संघर्ष और पीएम मोदी की सराहना से प्रदेश में खुशी की लहर

हिमाचल की बेटी रेणुका ठाकुर आज अपने गांव पारसा (रोहड़ू, शिमला) लौट रही हैं। महिला क्रिकेट विश्व कप में शानदार प्रदर्शन कर भारत को जीत दिलाने के बाद यह उनकी पहली घर वापसी है। पूरे क्षेत्र में खुशी और गर्व का माहौल है। ग्रामीणों, परिजनों और प्रशासन ने उनके स्वागत के लिए खास तैयारियां की हैं। जगह-जगह सजावट की गई है और ढोल-नगाड़ों की धुन पर उनका भव्य स्वागत किया जाएगा।
सुबह करीब 10 बजे रेणुका हाटकोटी स्थित दुर्गा माता मंदिर में पूजा-अर्चना करेंगी। इसके बाद एसडीएम कार्यालय सभागार में प्रशासन की ओर से उनका सम्मान समारोह आयोजित किया गया है। दोपहर बाद वह अपने गांव पारसा पहुंचेंगी, जहां परिवार और ग्रामीण मिलकर उनका अभिनंदन करेंगे। सभी लोग इस ऐतिहासिक पल के साक्षी बनने को उत्सुक हैं।

रेणुका ठाकुर की सफलता के पीछे उनकी मां सुनीता ठाकुर का वर्षों का त्याग और संघर्ष छिपा है। पिता केहर सिंह ठाकुर के निधन के बाद घर की सारी जिम्मेदारी मां पर आ गई थी। उस समय सुनीता जल शक्ति विभाग में दैनिक वेतनभोगी के रूप में कार्यरत थीं और उन्हें मात्र 1500 रुपये वेतन मिलता था। इतनी सीमित आय में उन्होंने बच्चों की परवरिश की और बेटी के क्रिकेट के सपने को कभी टूटने नहीं दिया। कई बार उन्होंने खुद भूखे रहकर बेटी को हिमाचल प्रदेश क्रिकेट अकादमी भेजा ताकि उसका प्रशिक्षण जारी रह सके।

दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के दौरान रेणुका की मां सुनीता ठाकुर की संघर्षगाथा की प्रधानमंत्री ने विशेष सराहना की। उन्होंने कहा कि एक सिंगल पेरेंट के रूप में सुनीता का योगदान प्रेरणादायक है और उनके त्याग ने पूरे देश में मातृत्व और दृढ़ता की मिसाल कायम की है। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि वे हिमाचल के लोगों की मेहनत और संघर्ष को भलीभांति जानते हैं, क्योंकि उन्होंने वर्षों तक प्रदेश में पार्टी प्रभारी के रूप में कार्य किया है।

सुनीता ठाकुर ने कहा कि बेटी की उपलब्धि ने उन्हें गौरवान्वित किया है और प्रधानमंत्री की प्रशंसा ने उनके संघर्ष के दिनों का दर्द मिटा दिया। रेणुका के स्वागत को लेकर गांव में उल्लास का वातावरण है। हर ओर गर्व और खुशी की लहर है। यह सिर्फ एक बेटी के घर लौटने का दिन नहीं, बल्कि एक मां के त्याग, समर्पण और हिमाचल की मिट्टी की मेहनत की जीत का दिन है।