हिमाचल प्रदेश से राज्यसभा सांसद अनुराग शर्मा के खिलाफ नामांकन के दौरान संपत्ति का पूरा विवरण न देने और गलत हलफनामा दाखिल करने के आरोपों को लेकर Himachal Pradesh High Court में जनहित याचिका दायर की गई है। इस मामले में बुधवार को सुनवाई हुई, जिसमें मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने प्रदेश सरकार, चुनाव आयोग और सांसद अनुराग शर्मा को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
सुनवाई के दौरान अदालत ने याचिकाकर्ता से यह भी पूछा कि इस मामले में चुनाव याचिका क्यों नहीं दायर की गई। इस पर याचिकाकर्ता ने स्पष्ट किया कि चुनाव याचिका केवल संबंधित चुनाव में भाग लेने वाला प्रत्याशी ही दाखिल कर सकता है। मामले की अगली सुनवाई 21 मई को निर्धारित की गई है।
यह याचिका अधिवक्ता विनय शर्मा द्वारा दायर की गई है। इसमें आरोप लगाया गया है कि 7 मार्च 2026 को राज्यसभा के लिए निर्वाचित घोषित किए गए अनुराग शर्मा ने अपने नामांकन पत्र के साथ दिए गए हलफनामे में अपनी सभी संपत्तियों का पूर्ण खुलासा नहीं किया।
याचिका में यह भी कहा गया है कि नामांकन के समय वह सरकारी ठेकेदार के रूप में सक्रिय थे और उनके नाम पर लोक निर्माण विभाग के कई करोड़ रुपये के ठेके चल रहे थे। जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 9ए के तहत, सरकार के साथ सक्रिय अनुबंध रखने वाला व्यक्ति चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य ठहराया जा सकता है। इस मामले में चुनाव आयोग सहित कई पक्षों को प्रतिवादी बनाया गया है।









