प्रयागराज में दर्ज यौन शोषण मामले को लेकर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती फिर चर्चा में हैं। आरोपों के बाद उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई तेज हुई और गिरफ्तारी की संभावना जताई जाने लगी। हालांकि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फिलहाल उन्हें राहत देते हुए अंतिम आदेश तक गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया है।
मामला आश्रम से जुड़े कुछ बटुकों की शिकायत पर दर्ज हुआ था। आरोप है कि आश्रम में उनके साथ यौन उत्पीड़न हुआ। पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की और मेडिकल परीक्षण में उत्पीड़न की पुष्टि होने की बात सामने आई, जिससे मामला गंभीर हो गया। इसके बाद स्वामी और उनके शिष्य मुकुंदानंद गिरी ने अग्रिम जमानत के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की।
सुनवाई के दौरान अदालत ने पूछा कि पहले सत्र न्यायालय में आवेदन क्यों नहीं किया गया। साथ ही पुलिस से कथित पीड़ितों की स्थिति और बयानों पर जानकारी मांगी। राज्य सरकार ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि आरोपी प्रभावशाली हैं और उन्हें राहत मिलने से जांच प्रभावित हो सकती है। बचाव पक्ष ने आरोपों को साजिश करार दिया। हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि दोनों आरोपी जांच में सहयोग करें। अब अंतिम फैसले पर सबकी नजर है, जो आगे की कानूनी दिशा तय करेगा।









