हरियाणा सरकार ने शहरी विकास को गति देने के लिए मिश्रित भूमि उपयोग (मिक्स्ड लैंड यूज) नीति को मंजूरी दे दी है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल बैठक में लिए गए इस फैसले से लंबे समय से अटकी विकास परियोजनाओं को अब आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हो गया है। नई नीति के तहत आवासीय, वाणिज्यिक और संस्थागत गतिविधियों को मिश्रित भूमि उपयोग क्षेत्रों में अनुमति दी जाएगी। सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब परियोजनाओं के लिए किसी तय प्रतिशत सीमा (कैप) की बाध्यता नहीं होगी।
हालांकि, क्षेत्र, पहुंच, बुनियादी ढांचे और अन्य नियामकीय मानकों का पालन अनिवार्य रहेगा। नीति में उपयोग के संतुलन के लिए 70:30 का फार्मूला लागू किया गया है, जिसमें किसी भी परियोजना का 70 प्रतिशत हिस्सा मुख्य उपयोग और अधिकतम 30 प्रतिशत हिस्सा सहायक उपयोग के लिए रहेगा। आवश्यकता अनुसार सहायक उपयोग को 7.5 प्रतिशत तक कम किया जा सकता है। औद्योगिक उपयोग को लेकर नीति में सख्ती बरकरार रखी गई है। जहां पहले से औद्योगिक गतिविधियां मौजूद हैं, वहां इन्हें मौजूदा सीमा तक ही सीमित रखा जाएगा और भविष्य में विस्तार की अनुमति नहीं होगी।
भूमि स्वामियों को अपने जमीन का उपयोग बदलने के लिए निर्धारित नियमों और शर्तों का पालन करना होगा। बिना नियमों के पालन किए उपयोग परिवर्तन की अनुमति नहीं दी जाएगी। सरकार ने न्यूनतम भू-आकार, फ्लोर एरिया रेशियो (FAR) और ग्राउंड कवरेज जैसे मानक भी तय किए हैं, जिससे परियोजनाओं की योजना और क्रियान्वयन में स्पष्टता आएगी। नई नीति से रियल एस्टेट सेक्टर को गति मिलने, निवेश बढ़ने और रोजगार के नए अवसर सृजित होने की उम्मीद है, साथ ही अटकी परियोजनाओं को भी राहत मिलेगी।









