अमेरिका की H-1B वीजा प्रक्रिया में देरी के कारण कई भारतीय पेशेवर भारत में फंस गए हैं। ट्रंप प्रशासन की सोशल मीडिया जांच और स्टैम्पिंग में लंबी प्रक्रिया के चलते कई उम्मीदवार मार्च या अप्रैल तक वीजा इंटरव्यू के लिए प्रतीक्षा कर रहे हैं। इसके कारण स्टार्टअप और छोटी कंपनियों में काम करने वाले कर्मचारियों की नौकरियाँ खतरे में हैं, साथ ही उनकी सैलरी प्रभावित हो रही है।
इमिग्रेशन और टैक्स एक्सपर्ट्स का कहना है कि लंबी अवधि तक भारत में रहने वाले H-1B होल्डर्स को भारतीय इनकम टैक्स का सामना करना पड़ सकता है। अगर कोई कर्मचारी वित्तीय वर्ष में 182 दिन या उससे अधिक भारत में रहता है, तो उसे टैक्स के लिहाज से भारत का रेजिडेंट माना जाएगा। कंपनियाँ भारत में रिमोट वर्क की अनुमति दे रही हैं या कर्मचारियों को अस्थायी रूप से सहयोगी कंपनियों में तैनात कर रही हैं।
टैक्स और कानूनी जोखिम भी बढ़ गए हैं। कंपनियों को यह सुनिश्चित करना पड़ रहा है कि भारत में किए गए काम से उनके ऊपर कोई कॉर्पोरेट टैक्स दायित्व न बने। कई परिवार भी इस दौरान अलग-अलग देशों में रह रहे हैं। कर्मचारियों के लिए खर्च और तनाव बढ़ गया है, क्योंकि वे घर का किराया, बिल और जीवनयापन भारत में रहते हुए ही संभाल रहे हैं।









