देश में ग्रीन मोबिलिटी को बढ़ावा देने के लिए चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की बड़ी बाधा अब दूर होने जा रही है। ऊर्जा मंत्रालय ने चार्जिंग स्टेशन पर इस्तेमाल होने वाले उपकरणों की दरों को संशोधित कर दिया है। इसके बाद राज्य सरकारें नोडल एजेंसियों के माध्यम से चार्जिंग प्वाइंट और स्टेशन बनाने का काम जल्द शुरू कर सकेंगी। अब तक पुरानी दरों के कारण कई राज्यों में परियोजनाएं अटकी हुई थीं।पीएम ई-ड्राइव योजना के तहत केंद्र सरकार ने चार्जिंग ढांचा विकसित करने के लिए 2,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। इस योजना में राज्यों को चार्जिंग स्टेशन पर आने वाले खर्च पर 100 प्रतिशत तक सब्सिडी देने का प्रावधान है।
राज्यों का कहना था कि पिछले कुछ वर्षों में उपकरणों की कीमतें काफी बढ़ चुकी हैं, ऐसे में नई दरें तय होना जरूरी था। ऊर्जा मंत्रालय द्वारा संशोधित दरें जारी किए जाने के बाद अब इस दिशा में तेजी आने की उम्मीद है। सरकार का अनुमान है कि वर्ष 2030 तक देश में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी 10 प्रतिशत से अधिक हो जाएगी। इस बढ़ती जरूरत को देखते हुए देशभर में 72 हजार से ज्यादा सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए जाने हैं, ताकि इलेक्ट्रिक वाहन उपयोगकर्ताओं को पर्याप्त सुविधाएं मिल सकें।









