दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट (IGI) पर 6 और 7 नवंबर को तकनीकी गड़बड़ी के कारण हवाई उड़ानों में गंभीर बाधा उत्पन्न हुई। जांच में सामने आया कि एयरपोर्ट के GPS (ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम) सिग्नल में जानबूझकर छेड़छाड़ की गई थी, जिससे पायलटों को रनवे की जगह नकली दृश्य दिखाई देने लगे।
सूत्रों के अनुसार, शाम लगभग 7 बजे पायलटों की कॉकपिट स्क्रीन पर विमान की वास्तविक स्थिति बदल गई और फेक GPS सिग्नल मिलने लगे। पायलटों ने ऑटोमैटिक सिस्टम की बजाय मैनुअल मोड में विमान नियंत्रित किया, जिससे किसी बड़े हादसे को टाला गया। इस घटना से लगभग 800 घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानें प्रभावित हुईं और 20 उड़ानें रद्द करनी पड़ीं।
एयरलाइन कंपनियों ने औसतन 50 मिनट की देरी की सूचना दी। विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिकी सिविलियन GPS ओपन सिग्नल पर आधारित है और इसे नकली रूप में भेजा जा सकता है, जबकि मिलिट्री GPS एन्क्रिप्टेड होने के कारण सुरक्षित रहते हैं। DGCA की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में हाल के महीनों में 465 से ज्यादा GPS छेड़छाड़ के मामले दर्ज हुए हैं। सच्चाई यह है कि इस घटना में किसी विमान या यात्रियों को कोई चोट नहीं आई, और पायलटों की सतर्कता से बड़ी दुर्घटना टली।
विशेषज्ञों का मानना है कि ISRO का स्वदेशी NavIC सिस्टम लागू होने पर ऐसी घटनाओं से सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है। केंद्र सरकार ने उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं ताकि किसी साइबर हमला या विदेशी तंत्र की भूमिका की पुष्टि हो सके।

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दिल्ली एयरपोर्ट पर GPS छेड़छाड़ से उड़ानों में भारी बाधा, 800 उड़ानें प्रभावित
- by Nancy Sharma
- November 10, 2025
- Less than a minute
- 4 months ago








