देशभर में आज गिग वर्कर्स ने अपने अधिकारों और बेहतर कामकाजी परिस्थितियों की मांग को लेकर हड़ताल की है। जोमैटो, स्विगी, ब्लिंकिट और जेप्टो जैसे प्लेटफॉर्म्स के राइडर्स ने सड़कों पर उतरकर काम बंद कर दिया है। यह विरोध प्रदर्शन Gig and Platform Service Workers Union (GIPSWU) के नेतृत्व में आयोजित किया गया है। इस हड़ताल से पहले 26 जनवरी को भी राइडर्स ने प्रदर्शन किया था, लेकिन उनका कहना है कि तब उनकी कोई मांग पूरी नहीं हुई थी।
गिग वर्कर्स का कहना है कि उन्हें लंबे समय से काम की असुरक्षा और कम आमदनी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। राइडर्स का आरोप है कि कंपनियां बिना किसी स्पष्ट कारण के उनकी ID ब्लॉक कर देती हैं, जिससे उनकी रोजी-रोटी प्रभावित होती है। इसके अलावा, तेजी से डिलीवरी करने का दबाव और पेट्रोल की बढ़ती कीमतें उनके लिए जोखिम और आर्थिक कठिनाइयां पैदा कर रही हैं। महिला गिग वर्कर्स ने कार्यस्थल पर सुरक्षा और सम्मान की कमी की भी शिकायत उठाई है।
राइडर्स की प्रमुख मांगों में कम से कम 20 रुपये प्रति किलोमीटर या 24,000 रुपये मासिक न्यूनतम वेतन, ID ब्लॉकिंग पर रोक, ईएसआई, पीएफ और दुर्घटना बीमा जैसी सामाजिक सुरक्षा, और उनके रेटिंग और कमाई तय करने वाले एल्गोरिदम में पारदर्शिता शामिल हैं। इसके अलावा, वे चाहते हैं कि उन्हें औपचारिक मजदूर का दर्जा दिया जाए और उनके लिए एक अलग केंद्रीय कानून बने।
इस हड़ताल का आम जनता पर असर नजर आने लगा है। कई शहरों में डिलीवरी सेवाओं में देरी हो रही है और कुछ क्षेत्रों में “Service Unavailable” जैसी स्थिति सामने आ रही है। ओला-उबर जैसी राइडिंग सेवाओं और अमेजन, फ्लिपकार्ट जैसी ई-कॉमर्स डिलीवरी पर भी इसका आंशिक प्रभाव पड़ सकता है।









