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“समाजसेवा से सर्वोच्च पद तक: प्रतिभा देवी सिंह पाटिल का सफ़र”

देश की पहली महिला राष्ट्रपति प्रतिभा देवी सिंह पाटिल आज, यानी 19 दिसंबर, अपना 91वां जन्मदिन मना रही हैं। महाराष्ट्र के जलगांव जिले में 19 दिसंबर 1934 को जन्मीं प्रतिभा पाटिल का जीवन समाजसेवा, संघर्ष और प्रेरणा से भरा रहा है। राजनीति में कदम रखने से पहले वह सामाजिक कार्यों से जुड़ी रहीं और महिलाओं के उत्थान के लिए लगातार काम करती रहीं। शुरुआती शिक्षा जलगांव से पूरी करने के बाद उन्होंने मूलजी जैठा कॉलेज से ग्रेजुएशन और मुंबई के गवर्नमेंट लॉ कॉलेज से वकालत की पढ़ाई की। कॉलेज के दिनों में वह टेबल टेनिस की बेहतरीन खिलाड़ी रहीं और अपनी प्रतिभा व व्यक्तित्व के कारण उन्हें ‘कॉलेज क्वीन’ का खिताब भी मिला।

महज 27 साल की उम्र में राजनीति में प्रवेश करने वाली प्रतिभा पाटिल ने कांग्रेस के टिकट पर मुक्तिनगर विधानसभा सीट से लगातार चार बार जीत दर्ज की। महाराष्ट्र सरकार में उन्होंने उपमंत्री और बाद में समाज कल्याण मंत्री के रूप में अहम भूमिका निभाई। राजनीतिक सफ़र में आगे बढ़ते हुए वह राज्यसभा की उपसभापति, अमरावती से लोकसभा सांसद और राजस्थान की राज्यपाल भी रहीं। आखिरकार 25 जुलाई 2007 को उन्होंने करीब तीन लाख वोटों से जीत दर्ज कर देश की पहली महिला राष्ट्रपति बनने का इतिहास रचा। कॉलेज की खिलाड़ी से लेकर राष्ट्रपति भवन तक का यह सफ़र, प्रतिभा पाटिल को हर भारतीय महिला के लिए प्रेरणा का प्रतीक बनाता है।