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नए साल में बदलेगा GDP, महंगाई और IIP मापने का तरीका, आम आदमी को होगा सीधा फायदा

नए साल में देश की अर्थव्यवस्था को मापने का तरीका बदलने जा रहा है। सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने घोषणा की है कि जीडीपी, खुदरा महंगाई और औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) की नई शृंखलाएं अगले वर्ष जारी की जाएंगी, जिनमें इनके आधार वर्ष बदले जाएंगे। मंत्रालय के अनुसार, खुदरा मुद्रास्फीति की नई शृंखला के लिए आधार वर्ष 2024 तय किया गया है, जिसे 12 फरवरी 2026 को जारी किया जाएगा।

वहीं, जीडीपी और राष्ट्रीय लेखा से जुड़े संशोधित आंकड़ों के लिए वित्त वर्ष 2022-23 को आधार वर्ष माना जाएगा और ये आंकड़े 27 फरवरी 2026 को प्रकाशित होंगे। IIP की नई शृंखला भी 2022-23 को आधार वर्ष मानते हुए 28 मई 2026 को जारी की जाएगी।सरकार का कहना है कि आधार वर्ष बदलने का उद्देश्य बदलती आर्थिक संरचना, उपभोक्ताओं की खर्च करने की आदतों और तकनीकी बदलावों को आंकड़ों में बेहतर ढंग से शामिल करना है।

नई महंगाई शृंखला में मोबाइल, इंटरनेट, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे मौजूदा खर्चों को अधिक महत्व मिलेगा, जिससे महंगाई का आंकड़ा आम लोगों की वास्तविक जरूरतों के ज्यादा करीब होगा। विशेषज्ञों के मुताबिक, इससे महंगाई की दर नहीं बदलेगी, बल्कि उसकी गणना अधिक सटीक होगी। संशोधित आंकड़ों का असर महंगाई भत्ता, पेंशन, मजदूरी और ब्याज दरों से जुड़े नीतिगत फैसलों पर पड़ेगा। साथ ही, जीडीपी और IIP की नई शृंखला से उत्पादन और रोजगार की स्थिति साफ होगी, जिससे सरकार अधिक प्रभावी आर्थिक और सामाजिक नीतियां बना सकेगी।