प्रधानमंत्री Narendra Modi की अध्यक्षता में नई प्रधानमंत्री कार्यालय इमारत ‘सेवा तीर्थ’ में केंद्रीय मंत्रिमंडल की ऐतिहासिक पहली बैठक आयोजित हुई। यह भवन ब्रिटिश काल की बैरकों के स्थान पर नए भारत के पुनर्निर्माण और प्रशासनिक बदलाव का प्रतीक माना जा रहा है। बैठक का आयोजन शुभ तिथि युगाब्द 5127, विक्रम संवत 2082 और शक संवत 1947 के फाल्गुन शुक्ल पक्ष की अष्टमी को हुआ। इस बैठक में मंत्रिमंडल ने ‘नागरिक देवो भव’ की भावना के साथ शासन को सेवा, समर्पण और राष्ट्र निर्माण के नए युग की ओर ले जाने का संकल्प दोहराया।
सरकार की ओर से कहा गया कि स्वतंत्रता के बाद कई दशकों तक प्रधानमंत्री कार्यालय दक्षिण ब्लॉक से संचालित होता रहा, लेकिन ‘सेवा तीर्थ’ का निर्माण औपनिवेशिक काल की अस्थायी संरचनाओं के स्थान पर नए भारत के दृष्टिकोण को दर्शाता है। मंत्रिमंडल ने कहा कि यह भवन शासन को शक्ति प्रदर्शन का केंद्र बनाने के बजाय नागरिक सशक्तिकरण का केंद्र बनाएगा। इस नई कार्य संस्कृति में प्रत्येक नीति को संविधान के मूलभूत मूल्यों, समानता, न्याय और नागरिक गरिमा से जोड़कर देखा जाएगा।
सरकार ने स्पष्ट किया कि ‘सेवा तीर्थ’ से लिए जाने वाले हर निर्णय का उद्देश्य देश की 1.4 अरब आबादी के जीवन को सरल बनाना होगा। इस परिसर को एक तीर्थस्थल की तरह पवित्र मानते हुए कर्तव्य, सेवा और समर्पण की भावना से शासन संचालन करने की बात कही गई है। मंत्रिमंडल ने दोहराया कि पारदर्शी और संवेदनशील शासन मॉडल को मजबूत करते हुए देश के अंतिम व्यक्ति तक विकास योजनाओं का लाभ पहुंचाना प्राथमिक लक्ष्य रहेगा।









