दिग्गज अभिनेत्री कामिनी कौशल का 98 वर्ष की आयु में निधन भारतीय सिनेमा के लिए एक बड़ी क्षति है। लगभग आठ दशकों तक अभिनय से जुड़ी रहीं कामिनी कौशल उन चुनिंदा कलाकारों में शामिल थीं, जिन्होंने अपने समय के साथ-साथ नई पीढ़ियों पर भी गहरा प्रभाव छोड़ा। सादगी, सहजता और गहरी संवेदनशीलता से भरे उनके अभिनय ने उन्हें दर्शकों के दिलों में एक अलग पहचान दिलाई।
लाहौर में जन्मी कामिनी कौशल ने शुरुआती दौर में ही थिएटर और रेडियो से अपना सफर शुरू किया। इसके बाद 1940 के दशक में फिल्मों में प्रवेश करते ही वह दर्शकों और फिल्मकारों की पहली पसंद बन गईं। उन्होंने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत चेतन आनंद द्वारा निर्देशित नीचा नगर से की, जिसने अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत को पहली बार बड़ी पहचान दिलाई। यही वह फिल्म थी जिसे कान फिल्म फेस्टिवल में पहली बार सर्वश्रेष्ठ फिल्म का सम्मान मिला था। इस फिल्म के जरिए न सिर्फ भारतीय सिनेमा को सम्मान मिला, बल्कि कामिनी कौशल को भी बतौर अभिनेत्री दुनिया के सामने पहचान मिली।
उनके करियर का दायरा बेहद विस्तृत रहा। अशोक कुमार, दिलीप कुमार, राज कपूर, देव आनंद और धर्मेंद्र जैसे महान नायकों के साथ उन्होंने कई यादगार भूमिकाएँ निभाईं। चाहे भावनात्मक दृश्य हों या हल्के-फुल्के दृश्य—उन्होंने हर फ्रेम में अपनी उपस्थिति को सहजता से दर्ज कराया। बाद के वर्षों में भी उन्होंने चरित्र भूमिकाओं में उतनी ही मजबूती दिखाई, जितनी शुरुआती दिनों में मुख्य भूमिकाओं में दिखाती थीं।
नई पीढ़ी के दर्शक भी उन्हें शाहरुख खान सहित कई बड़े अभिनेताओं के साथ उनके बाद के कामों से अच्छी तरह याद करते हैं। उनकी सरलता, विनम्रता और मेहनत उन्हें अपने समय की अन्य अभिनेत्रियों से अलग बनाती थी। परिवार के नजदीकी सूत्रों ने बताया है कि वे पिछले कुछ समय से उम्र संबंधी दिक्कतों से जूझ रही थीं और शांतिपूर्वक इस दुनिया से विदा हुईं। कामिनी कौशल का जाना केवल एक कलाकार का खोना नहीं, बल्कि भारतीय सिनेमा के एक पूरे दौर का समाप्त होना है। उनका योगदान, उनकी कला और उनका प्रभाव आने वाले वर्षों तक याद किया जाता रहेगा।









