जमीयत उलेमा-ए-हिंद के प्रमुख मौलाना अरशद मदनी के हालिया बयान ने देश में बहस छेड़ दी। मदनी ने कहा कि भारत में मुसलमान उच्च पद, जैसे विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर तक नहीं बन सकते, जबकि विदेशों में वे बड़े पदों पर कार्यरत हैं। उनके इस बयान ने दो खेमे बना दिए—एक उनका समर्थन कर रहा था और दूसरा उनके दावे को गलत बता रहा था।
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस बयान पर कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि भारत में मुसलमानों के लिए अवसर उपलब्ध हैं और अगर कोई देशभक्त और मेहनती है, तो वह ऊंचे पद हासिल कर सकता है। फडणवीस ने एपीजे अब्दुल कलाम का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होंने मुसलमान होते हुए भी राष्ट्रपति बनकर सभी के लिए प्रेरणा स्थापित की।
फडणवीस ने यह भी कहा कि ऐसे महान व्यक्तित्वों को ही उदाहरण बनाकर पेश करना चाहिए। उन्होंने मदनी के कथन की आलोचना करते हुए स्पष्ट किया कि भारत में मुसलमानों के साथ भेदभाव का आरोप निराधार है और देश के सच्चे योगदानकर्ताओं को सम्मान मिलना चाहिए। भारत में मुस्लिम समुदाय के लिए कई प्रेरणादायक व्यक्तित्व मौजूद हैं, जिनसे सीख लेकर समाज में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है।









