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आबकारी नीति मामला: हाई कोर्ट ने केजरीवाल और सिसोदिया को दिया अंतिम मौका, जवाब न देने पर अधिकार खत्म

दिल्ली की बहुचर्चित आबकारी नीति मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और अन्य संबंधित पक्षों को जवाब दाखिल करने के लिए आखिरी अवसर दिया है। न्यायमूर्ति स्वर्णकांत शर्मा ने स्पष्ट कहा कि यदि अब भी जवाब दाखिल नहीं किया गया, तो संबंधित पक्ष अपना अधिकार खो देंगे।

ईडी ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाते हुए निचली अदालत के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें केजरीवाल और अन्य को आरोपमुक्त किया गया था। एजेंसी की मांग है कि फैसले में जांच एजेंसियों के खिलाफ की गई टिप्पणियों को हटाया जाए। साथ ही, ईडी ने उन मामलों में भी राहत मांगी है, जिनमें समन जारी होने के बावजूद पेश न होने पर केजरीवाल को बरी किया गया था। अदालत ने इस मामले में नोटिस जारी करते हुए अगली सुनवाई 29 अप्रैल तय की है। कोर्ट ने यह भी कहा कि संबंधित पक्षों को पहले से जानकारी होने के बावजूद पेश न होना गंभीर मुद्दा है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

ईडी का आरोप है कि केजरीवाल ने जानबूझकर समन का पालन नहीं किया और जांच से बचने के लिए आधारहीन आपत्तियां उठाईं। एजेंसी का यह भी दावा है कि मामले के अन्य आरोपी पूर्व मुख्यमंत्री के संपर्क में थे और उन्होंने नीति निर्माण में भूमिका निभाई, जिसके बदले उन्हें अनुचित लाभ मिला। फिलहाल, मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े इस मामले में केजरीवाल अंतरिम जमानत पर हैं, जबकि मामले की कानूनी प्रक्रिया जारी है।