बहुत बार हमारे जीवन में कुछ भी गलत होने पर हम यह मान लेते हैं कि किसी की बुरी नजर लग गई है। काम बिगड़ना, अचानक बीमारी या परेशानियों का बढ़ जाना—इन सबको हम ‘नज़र का असर’ मान बैठते हैं। लेकिन वृंदावन के प्रसिद्ध संत प्रेमानंद महाराज कहते हैं कि इसका असली कारण हमारे अपने कर्म हैं।
हाल ही में एक सत्संग में एक भक्त ने महाराज से पूछा कि क्या वाकई किसी की बुरी नजर हमारे काम बिगाड़ सकती है। प्रेमानंद महाराज ने सहज मुस्कान के साथ स्पष्ट किया कि जीवन में जो कुछ भी होता है, वह हमारे स्वयं के कर्मों का फल होता है। जब हम असफल होते हैं और उसे नजर या दुर्भाग्य का नाम देते हैं, तो हम अपनी जिम्मेदारी से बचने की कोशिश कर रहे होते हैं। महाराज ने यह भी बताया कि ईश्वर का नाम जपना हमारी रक्षा करता है। जब मन ईश्वर में स्थिर रहता है, तो कोई नकारात्मक शक्ति हमें नुकसान नहीं पहुँचा सकती। घर से बाहर निकलते समय प्रभु का नाम जपना, जीवन में एक अदृश्य कवच का काम करता है।
साथ ही उन्होंने कहा कि बुरी नजर का डर हमारे आत्मविश्वास को कमजोर कर देता है और यही असली कारण होता है कि काम बिगड़ जाता है। नकारात्मक सोच को त्यागकर, सत्य, सेवा और सुमिरन की ओर ध्यान दें। यदि आप नेक कर्म कर रहे हैं और मन में ईश्वर का स्मरण है, तो कोई बाधा आपकी राह रोक नहीं सकती। प्रेमानंद महाराज की सीख हमें यह समझाती है कि असली शक्ति हमारे कर्म और मन की स्थिति में है, न कि किसी बाहरी नज़र में। डर और भ्रम को छोड़कर, सकारात्मक जीवन की दिशा में कदम बढ़ाएँ।









