जेफ्री एपस्टीन फाइल्स को लेकर फिर से विश्व स्तर पर चर्चा छिड़ गई है, जिसमें भारत में भी इसको लेकर चर्चा हो रही है। कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इजरायल यात्रा से पहले एपस्टीन से सलाह ली और यह डोनाल्ड ट्रंप के फायदे के लिए था। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इस दावे को पूरी तरह झूठा बताया और स्पष्ट किया कि पीएम मोदी की इजरायल यात्रा 2017 में आधिकारिक थी और किसी प्रकार के व्यक्तिगत या राजनीतिक लाभ के लिए नहीं की गई थी।
एपस्टीन फाइल्स में 30 लाख से अधिक पृष्ठ शामिल हैं, जिन्हें एपस्टीन फाइल पारदर्शिता अधिनियम के तहत सार्वजनिक किया गया। इन दस्तावेजों में तस्वीरें, कॉल लॉग, साक्षात्कार के प्रतिलेख और अदालत के रिकॉर्ड शामिल हैं, जिनका उद्देश्य एपस्टीन और उसकी सहयोगी घिसलेन मैक्सवेल द्वारा किए गए अपराधों की जांच को पारदर्शी बनाना है।
घिसलेन मैक्सवेल को 2021 में नाबालिग लड़कियों की तस्करी में दोषी पाया गया था और उन्हें 20 साल की जेल हुई। न तो पीएम मोदी, न ही अन्य नेता जैसे डोनाल्ड ट्रंप या बिल क्लिंटन पर कोई सार्वजनिक आरोप सिद्ध हुआ है। MEA ने मीडिया और राजनीतिक दावों को बकवास करार देते हुए लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने का अनुरोध किया है।









