देश की रक्षा क्षमताओं को और मजबूत करने की दिशा में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने बड़ा कदम उठाया है। DRDO ने अगली पीढ़ी के अत्याधुनिक बख्तरबंद प्लेटफॉर्म (आर्मर्ड व्हीकल्स) का अनावरण किया है, जिन्हें भविष्य की युद्ध आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए डिजाइन किया गया है। इन प्लेटफॉर्म को वाहन अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान (VRDE) द्वारा विकसित किया गया है। इसका अनावरण महाराष्ट्र के अहिल्यानगर स्थित DRDO प्रयोगशाला परिसर में रक्षा विभाग (R&D) के सचिव और DRDO अध्यक्ष डॉ. एस. वी. कामत ने किया। डॉ. कामत ने कहा कि ये अत्याधुनिक प्लेटफॉर्म भारतीय सशस्त्र बलों की बदलती परिचालन जरूरतों को पूरा करने में अहम भूमिका निभाएंगे। इनमें उन्नत मारक क्षमता, बेहतर गतिशीलता और उच्च स्तर की सुरक्षा जैसे फीचर्स शामिल हैं।
इन व्हीकल्स में स्वदेशी रूप से विकसित 30 मिमी क्रूलेस बुर्ज, 7.62 मिमी पीकेटी गन और एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल लॉन्च सिस्टम को एकीकृत किया गया है। साथ ही, उच्च क्षमता वाले इंजन और ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन इन्हें कठिन भू-भाग में भी तेज और प्रभावी संचालन की क्षमता प्रदान करते हैं। सुरक्षा के लिहाज से ये प्लेटफॉर्म STANAG स्तर 4 और 5 के अनुरूप बैलिस्टिक और विस्फोटक सुरक्षा से लैस हैं। साथ ही, हाइड्रो जेट तकनीक की मदद से इन्हें एम्फीबियस क्षमता भी प्राप्त है, जिससे ये जल बाधाओं को आसानी से पार कर सकते हैं। इनकी एक खास बात इनकी मल्टी-रोल क्षमता है, जिसके तहत इन्हें अलग-अलग सैन्य अभियानों के अनुसार कॉन्फिगर किया जा सकता है।
फिलहाल इन प्लेटफॉर्म में लगभग 65 प्रतिशत स्वदेशी तकनीक का उपयोग किया गया है, जिसे बढ़ाकर 90 प्रतिशत तक करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके निर्माण में टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड, भारत फोर्ज लिमिटेड और कई MSME इकाइयों की भागीदारी रही है, जिससे देश के रक्षा औद्योगिक ढांचे को भी मजबूती मिली है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को नई गति देगी और भारतीय सेना की परिचालन क्षमता को और अधिक सशक्त बनाएगी।









