डीएनए के डबल-हेलिक्स संरचना की खोज करने वाले अमेरिकी वैज्ञानिक जेम्स वॉटसन का 97 साल की उम्र में निधन हो गया। वॉटसन को उनकी इस खोज के लिए 1962 में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। 1953 में वॉटसन ने ब्रिटिश वैज्ञानिक फ़्रांसिस क्रिक के साथ मिलकर डीएनए की संरचना की पहचान की। इस खोज ने मॉलेक्यूलर बायोलॉजी और मेडिकल रिसर्च के क्षेत्र में क्रांति ला दी। वॉटसन की उम्र उस वक्त मात्र 24 साल थी, और उन्होंने इस खोज के बारे में कहा था, “यह बहुत खूबसूरत है।
उनकी रिसर्च में रोजलिंड फ्रैंकलिन और रेमंड गोसलिंग का एक्स-रे डेटा भी महत्वपूर्ण था। हालांकि, बाद में फ्रैंकलिन ने अपनी किताब “द डबल हेलिक्स” में वॉटसन की आलोचना की थी। वॉटसन ने अपने करियर में कई प्रतिष्ठित संस्थानों में योगदान दिया। उन्होंने कैलिफोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में दो साल बिताए, फिर हार्वर्ड विश्वविद्यालय में फैकल्टी के रूप में शामिल हुए। 1968 में वे कोल्ड स्प्रिंग हार्बर लैब के निदेशक बने और बाद में इसके अध्यक्ष और चांसलर भी रहे।
वॉटसन का जीवन केवल विज्ञान तक सीमित नहीं था। उन्होंने कई विवादास्पद बयान दिए, जिनमें नस्लीय और लैंगिक भेदभाव से जुड़े विचार शामिल थे। एक टीवी इंटरव्यू में उन्होंने काले और गोरे लोगों के बीच औसत IQ में अंतर के लिए जीन को जिम्मेदार बताया था। इन बयानों के कारण उनकी प्रतिष्ठा को झटका भी लगा।कोल्ड स्प्रिंग हार्बर लैब ने उनकी मौत की पुष्टि की है। जेम्स वॉटसन को उनके योगदान के लिए हमेशा याद रखा जाएगा, लेकिन उनकी जिंदगी में विवाद और आलोचना भी उतनी ही रही जितनी उनकी वैज्ञानिक उपलब्धियां।









