केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने हाल ही में देश का पहला केंद्रीकृत डिजिटल हथियार डेटाबेस लॉन्च किया है, जिसका नाम है ‘लॉस्ट, लूटेड एंड रिकवर्ड फायरआर्म्स’। इस पहल का उद्देश्य चोरी, लूटे गए और बरामद हथियारों की निगरानी को आसान और त्वरित बनाना है। इसे राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) द्वारा होस्ट किया जाएगा और केवल अधिकृत पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों को ही इसका एक्सेस मिलेगा।
इस डिजिटल प्लेटफॉर्म पर हर हथियार की पूरी जानकारी दर्ज होगी, जैसे उसका सीरियल नंबर, मॉडल, कैलिबर और बरामदगी की लोकेशन। यही नहीं, यह सिस्टम एनालिटिक्स आधारित है, यानी अगर कोई हथियार किसी नए अपराध में इस्तेमाल होता है, तो उसकी पुरानी हिस्ट्री तुरंत सामने आ जाएगी। इससे राज्यों के बीच डेटा साझा करना भी आसान हो जाएगा और अवैध हथियारों की गतिविधियों पर नजर रखना सरल होगा।
विशेषकर राज्य पुलिस, स्पेशल टास्क फोर्स और केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों को इससे अधिक लाभ होगा। अब किसी भी संदिग्ध हथियार की मूवमेंट पर तुरंत अलर्ट जारी किया जा सकेगा, जिससे आतंकवाद और संगठित अपराध के मामलों में तेजी आएगी।
इस पहल की सबसे बड़ी आवश्यकता इसलिए महसूस हुई क्योंकि पहले हथियारों की जानकारी राज्य स्तर पर अलग-अलग थी। अपराधी इसका फायदा उठाकर एक राज्य से हथियार चोरी कर दूसरे राज्य में इस्तेमाल कर सकते थे। नया डिजिटल डेटाबेस इस अंतर को भर देगा। उदाहरण के लिए, अगर बिहार से चोरी हुआ हथियार उत्तर प्रदेश में किसी अपराध में पाया जाता है, तो सिस्टम तुरंत उसकी पूरी ट्रैकिंग जानकारी उपलब्ध कराएगा। इस तरह यह डिजिटल पहल अपराध नियंत्रण और सुरक्षा एजेंसियों की कामकाजी क्षमता को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।









