राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में क्रिकेट प्रेमियों के लिए बड़ी खुशखबरी सामने आई है। शहर में एक और अत्याधुनिक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम बनाने की दिशा में तेजी से काम शुरू हो चुका है। प्रस्तावित स्टेडियम की बैठने की क्षमता करीब 60 से 70 हजार दर्शकों की होगी, जो मौजूदा अरुण जेटली स्टेडियम से लगभग दोगुनी है। वर्तमान स्टेडियम में करीब 35 हजार दर्शक ही बैठ सकते हैं। इन दिनों देश में ICC Men’s T20 World Cup का उत्साह चरम पर है और दिल्ली भी बड़े मुकाबलों की मेजबानी कर रही है। फिलहाल राजधानी में अंतरराष्ट्रीय मैचों के लिए यही एक प्रमुख मैदान है, लेकिन बढ़ती मांग को देखते हुए अब नए और बड़े स्टेडियम की जरूरत महसूस की जा रही है।
इस महत्वाकांक्षी परियोजना को लेकर दिल्ली एवं जिला क्रिकेट संघ (DDCA) सक्रिय है। संघ को उम्मीद है कि वर्ष के अंत तक स्टेडियम निर्माण के लिए जमीन का आवंटन हो सकता है। इसके लिए राज्य सरकार और केंद्र सरकार दोनों स्तर पर चर्चा जारी है। स्थान चयन को लेकर कई विकल्पों पर विचार किया जा रहा है। ओखला, द्वारका, रोहिणी और नरेला जैसे इलाकों में उपयुक्त जमीन तलाशने की कोशिश हो रही है। प्राथमिकता ऐसी जगह को दी जाएगी जहां मेट्रो और सड़क कनेक्टिविटी बेहतर हो, साथ ही होटल, अस्पताल और अन्य जरूरी सुविधाएं आसपास उपलब्ध हों।
DDCA अध्यक्ष रोहन जेटली का कहना है कि नया स्टेडियम विश्वस्तरीय सुविधाओं से लैस होगा ताकि दर्शकों को बेहतर अनुभव मिल सके। हाल ही में दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और International Cricket Council के चेयरमैन जय शाह के साथ भी इस परियोजना पर चर्चा हुई है। दोनों पक्षों ने राजधानी में आधुनिक खेल अवसंरचना विकसित करने में रुचि दिखाई है। केवल स्टेडियम ही नहीं, बल्कि इसके साथ एक क्रिकेट अकादमी, ट्रेनिंग एरिया और कई प्रैक्टिस नेट्स भी विकसित किए जाएंगे। पूरे प्रोजेक्ट के लिए करीब 45 एकड़ जमीन की आवश्यकता बताई जा रही है ताकि खिलाड़ियों को प्रशिक्षण के पर्याप्त संसाधन मिल सकें।
मौजूदा अरुण जेटली स्टेडियम के विस्तार में भौगोलिक बाधाएं हैं, जिसके कारण इसकी क्षमता बढ़ाना संभव नहीं है। इसके आसपास ऐतिहासिक और अन्य संरचनाएं मौजूद होने से विस्तार की गुंजाइश सीमित हो गई है। हालांकि नया स्टेडियम बनने के बाद भी इस मैदान पर अंतरराष्ट्रीय मैच आयोजित होते रहेंगे। दिल्ली में बड़े और आधुनिक क्रिकेट परिसर का सपना पहले भी देखा गया था, लेकिन वह योजना आगे नहीं बढ़ सकी। अब एक बार फिर प्रयास तेज हुए हैं। अगर सब कुछ योजना के मुताबिक रहा, तो आने वाले समय में दिल्ली देश के सबसे बड़े क्रिकेट केंद्रों में से एक बन सकता है।









