दिल्ली में बढ़ते वायु प्रदूषण और ट्रैफिक जाम से निपटने के लिए मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने नई रणनीति घोषित की है। सरकार ने साफ कर दिया है कि प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों के चालान अब किसी भी कीमत पर माफ नहीं होंगे। इसके तहत बिना वैध प्रदूषण जांच प्रमाणपत्र (PUC) वाले वाहनों पर जुर्माने को कम करने की कोई छूट नहीं दी जाएगी। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि यदि जरूरत पड़ी तो अदालत का सहारा भी लिया जाएगा। सरकार का उद्देश्य राजस्व वसूलना नहीं, बल्कि दिल्लीवासियों को स्वच्छ हवा देना है।
सार्वजनिक और निजी परिवहन दोनों में सुधार के लिए दिल्ली सरकार ओला और उबर जैसी कंपनियों के साथ मिलकर ई-बस सेवाओं की संभावना पर काम कर रही है। इससे निजी वाहनों का दबाव कम होगा और प्रदूषण रहित सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा मिलेगा। राजधानी में ई-रिक्शा यातायात को नियंत्रित करने के लिए नई गाइडलाइन जल्द जारी की जाएगी। इस गाइडलाइन के तहत ई-रिक्शाओं के संचालन क्षेत्र और रूट व्यवस्थित किए जाएंगे ताकि सड़क जाम कम हो और ट्रैफिक सुचारू रूप से चले।
साथ ही, दिल्ली परिवहन निगम (DTC) की बसों के रूटों को भी अधिक युक्तिसंगत बनाने का निर्णय लिया गया है। इसका उद्देश्य हर क्षेत्र तक कनेक्टिविटी बढ़ाना और लोगों को निजी वाहन के बजाय सार्वजनिक बस सेवा का विकल्प चुनने के लिए प्रेरित करना है। सूत्रों के अनुसार, नई इलेक्ट्रिक वाहन (EV) नीति का ड्राफ्ट जनवरी के पहले सप्ताह तक आ सकता है। इसमें दोपहिया और चारपहिया वाहनों के लिए सब्सिडी, खासकर मिडिल क्लास के लिए, प्रदान करने की योजना है। सरकार की कोशिश है कि दिल्ली को स्वच्छ, हरा-भरा और प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए ठोस कदम लगातार उठाए जाएं।









