दिल्ली में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए नई EV पॉलिसी 2.0 लगभग तैयार हो चुकी है और इसे जल्द ही लागू किए जाने की संभावना है। मौजूदा पॉलिसी 31 दिसंबर को खत्म हो रही है, ऐसे में सरकार नए साल की शुरुआत एक बेहतर और ज्यादा प्रभावी नीति के साथ करने की तैयारी में है। बताया जा रहा है कि इस नई पॉलिसी में वाहन की मार्केट कीमत के आधार पर 50% तक की छूट पर भी गंभीरता से विचार किया जा रहा है, हालांकि अंतिम फैसला कैबिनेट की मंजूरी के बाद ही होगा।
सरकार ने EV पॉलिसी का ड्राफ्ट तैयार कर लिया है, जिस पर मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स की बैठक होने वाली है। इसके बाद ड्राफ्ट को सार्वजनिक कर लोगों और अन्य हितधारकों से सुझाव लिए जाएंगे। नई पॉलिसी में बैटरी रीसाइक्लिंग पर विशेष ध्यान दिया गया है, क्योंकि EV बैटरियों की उम्र लगभग आठ साल होती है। इस कारण सरकार अब एक सुव्यवस्थित बैटरी रीसाइक्लिंग सिस्टम बनाने की दिशा में कदम बढ़ा रही है, जिससे इस्तेमाल की गई बैटरियों का सुरक्षित संग्रह, पुनर्चक्रण और निपटान सुनिश्चित किया जा सके।
चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत बनाने के लिए भी बड़े प्लान तैयार किए गए हैं। लक्ष्य है कि 2030 तक शहर में 5,000 से अधिक पब्लिक चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए जाएं, जिनमें कई तेज चार्जिंग पॉइंट भी शामिल होंगे। इन स्टेशनों को मल्टी-लेवल पार्किंग, आवासीय सोसाइटी, सरकारी इमारतों और प्रमुख सड़कों के आसपास स्थापित करने की योजना है। लास्ट-माइल कनेक्टिविटी को सुगम बनाने के लिए सरकार इलेक्ट्रिक वैन को भी लोकल ट्रांसपोर्ट सिस्टम का हिस्सा बनाना चाहती है। ये वैन संकरी गलियों, व्यस्त बाजारों और मेट्रो स्टेशनों के आसपास यात्रियों को बेहतर सुविधा दे सकेंगी। साथ ही, ई-रिक्शा के संचालन के लिए भी तय रूट्स की योजना तैयार की जा रही है।
नई EV पॉलिसी से उम्मीद है कि शहर में प्रदूषण स्तर में गिरावट आएगी, सार्वजनिक परिवहन की पहुंच बढ़ेगी और इलेक्ट्रिक व्हीकल तथा चार्जिंग सेक्टर में निवेश व रोजगार के नए अवसर बनेंगे। सरकार मानती है कि राजधानी में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को तेज गति से आगे बढ़ाने के लिए यह पॉलिसी अहम भूमिका निभाएगी।









