अगले साल से शुरू होने वाली जनगणना देश के इतिहास में पहली बार पूरी तरह डिजिटल होगी। इस प्रक्रिया में शामिल होने वाले करीब 34 लाख प्रगणक (जनगणना कर्मी) अपने ही स्मार्टफोन का उपयोग करके डेटा जुटाएंगे और उसे सीधे एक मोबाइल एप्लिकेशन के जरिए केंद्रीय सर्वर पर अपलोड करेंगे।
सूत्रों के मुताबिक, भारत के महापंजीयक कार्यालय (RGI) ने जनगणना के लिए जिस ऐप को तैयार किया है, वह एंड्रॉयड और आईओएस दोनों प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध रहेगा। ऐप अंग्रेजी के साथ-साथ विभिन्न क्षेत्रीय भाषाओं में भी इस्तेमाल किया जा सकेगा। वर्ष 2021 में विकसित किए गए इस एप्लिकेशन को अब तकनीकी रूप से और अधिक उन्नत किया गया है ताकि प्रगणक आसानी से इसका इस्तेमाल कर सकें।
पहली बार सभी भवनों की जियो-टैगिंग
रिपोर्ट के अनुसार, 2027 की जनगणना में पहली बार सभी आवासीय और गैर-आवासीय भवनों की जियो-टैगिंग की जाएगी। इससे पहले 2011 में सामाजिक-आर्थिक जाति जनगणना के दौरान भी पेपरलेस कार्य हुआ था, लेकिन तब कर्मियों को भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) द्वारा टैबलेट उपलब्ध कराए गए थे।
कर्मियों के स्तर पर ही होगा डेटा डिजिटाइजेशन
इस बार यदि किसी कारणवश डेटा कागज़ पर भी एकत्र किया जाता है तो उसे डेडिकेटेड वेब पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य होगा। इस तरह से पहली बार सभी आंकड़े कर्मियों के स्तर पर ही डिजिटल हो जाएंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे नतीजे पहले की तुलना में तेजी से सामने आ सकेंगे।
बजट और चरणबद्ध प्रक्रिया
केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन आने वाले RGI ने पूरी प्रक्रिया के लिए 14,618.95 करोड़ रुपये का बजट मांगा है। जनगणना दो चरणों में होगी—
- पहला चरण (अप्रैल से सितंबर 2026): मकान सूचीकरण
- दूसरा चरण (फरवरी 2027): जनसंख्या गणना
लद्दाख, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में यह प्रक्रिया सितंबर 2026 में ही पूरी कर ली जाएगी।
गौरतलब है कि आगामी जनगणना में जातिगत आंकड़े भी जुटाए जाएंगे और नागरिकों को स्वयं डेटा दर्ज करने का विकल्प भी मिलेगा।









