महाराष्ट्र की राजनीति में एनसीपी के भविष्य को लेकर असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है, जब अजित पवार के आकस्मिक निधन के बाद उनके गुट और शरद पवार के गुट के विलय को लेकर विरोधाभासी दावे सामने आए। शरद पवार ने संकेत दिया कि बंद कमरे में विलय पर बातचीत हुई थी, जिसमें केवल अजित पवार और कुछ वरिष्ठ नेता शामिल थे। हालांकि, देवेंद्र फडणवीस और अजित पवार के गुट के अन्य वरिष्ठ नेताओं ने इसे पूरी तरह असत्य बताया।
फडणवीस ने कहा कि अजित पवार महायुति सरकार में मजबूत स्थिति में थे और कभी भी विलय का मुद्दा नहीं उठाया। एनसीपी (अजित पवार गुट) के नेता प्रफुल पटेल, सुनील तटकरे और छगन भुजबल ने भी स्पष्ट किया कि 2023 में एनडीए में शामिल होना अंतिम निर्णय था और शरद पवार के साथ कोई विलय चर्चा नहीं हुई।
अब सुनेत्रा पवार को उपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ दिलाई गई है, जबकि पार्थ पवार को कम प्रोफाइल बनाए रखने की सलाह दी गई है। राजनीतिक जटिलताओं के बीच भाजपा भी पर्दे के पीछे एनसीपी गुटों के विलय पर असर डाल रही है। इस स्थिति ने पार्टी में नेतृत्व और सत्ता पर नियंत्रण के लिए संघर्ष को और तेज कर दिया है।









