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CJI सूर्यकांत का ऐतिहासिक निर्णय: अब ‘लीगल इमरजेंसी’ में अदालतें 24 घंटे खुली रहेंगी

भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने न्यायिक प्रक्रिया में महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए ऐतिहासिक निर्णय सुनाया है। उनके फैसले के अनुसार, किसी भी व्यक्ति को लीगल इमरजेंसी की स्थिति में अदालत का दरवाजा 24 घंटे खटखटाने का अधिकार होगा। इसका उद्देश्य ऐसे मामलों में मौलिक अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करना है, जहां गिरफ्तारी या अन्य कानूनी कार्रवाई की धमकी हो।

CJI सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि न्यायालयों की कार्यवाही भले ही सामान्य समय में स्थगित हो, लेकिन आपातकालीन परिस्थितियों में अदालत हमेशा उपलब्ध रहेगी। उन्होंने यह भी कहा कि लंबित याचिकाओं के तेजी से निपटान के लिए अधिक संवैधानिक पीठों का गठन करने पर विचार किया जा रहा है।

विशेष मामलों के लिए उच्चस्तरीय पीठों के गठन पर भी ध्यान दिया जा रहा है। उदाहरण के लिए, सबरीमाला मंदिर में हर उम्र की महिला को प्रवेश की अनुमति देने वाले सुप्रीम कोर्ट के आदेश के खिलाफ दायर याचिकाओं के लिए नौ सदस्यीय पीठ बनाने पर विचार किया जा रहा है। ऐसे मामलों में संवैधानिक अधिकारों और सामाजिक हितों के बीच संतुलन बनाने की चुनौती होती है।

वकीलों के लिए भी नए दिशा-निर्देश लागू किए गए हैं। अब महत्वपूर्ण मामलों में वकील लगातार कई दिनों तक बहस नहीं कर सकते और उन्हें तय समय सीमा के भीतर अपनी दलीलें प्रस्तुत करनी होंगी। यह कदम अदालत की सुनवाई प्रक्रिया को तेज और प्रभावी बनाने के लिए उठाया गया है। CJI सूर्यकांत का यह निर्णय भारतीय न्यायपालिका में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जो आपातकालीन परिस्थितियों में नागरिकों के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ-साथ न्याय की गति को भी बढ़ाएगा।